हरिद्वार:(ज़ीशान मलिक)तीर्थ नगरी में रविवार को गंगा के अचानक बढ़े जलस्तर ने घाट पर मौजूद श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की जान संकट में डाल दी। सप्तऋषि घाट पर टापू के समान स्थिति में फंसे 15 लोगों को जल पुलिस और फ्लड कंपनी ने कड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षित बाहर निकाल लिया। समय रहते मिली सूचना और प्रशासन की त्वरित सक्रियता से एक बड़ा हादसा होने से टल गया।
जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा रावत ने बताया कि सुबह लगभग 10:40 बजे कंट्रोल रूम को प्रतीक चतुर्वेदी नामक कॉलर से सूचना मिली कि सप्तऋषि घाट के समीप गंगा की तेज धारा के बीच 15 लोग फंस गए हैं। पहाड़ों में हो रही बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे किनारे पर मौजूद लोगों को संभलने का मौका नहीं मिला और वे चारों ओर पानी से घिर गए।
संयुक्त टीमों ने चलाया मोर्चा सूचना की संवेदनशीलता को देखते हुए तत्काल उच्चाधिकारियों को अवगत कराया गया। इसके बाद विशेष टीमों को बचाव उपकरणों के साथ मौके पर रवाना किया गया। घटनास्थल पर पहुँचते ही जवानों ने लाइफ जैकेट और रस्सियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया।सफलता उफनती लहरों के बीच बचाव दल ने धैर्य और साहस का परिचय देते हुए एक-एक कर सभी 15 फंसे हुए व्यक्तियों को किनारे तक पहुँचाया।
रेस्क्यू टीम में शामिल अधिकारियों ने बताया कि मानसून और पर्वतीय क्षेत्रों में जारी भारी बारिश के कारण गंगा का जलस्तर किसी भी समय अप्रत्याशित रूप से बढ़ सकता है। जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों से अपील की है कि वे नदी के जलस्तर पर नजर रखें और गहरे पानी या टापू नुमा स्थानों पर जाने से बचें।”सूचना मिलते ही आपदा प्रबंधन की सभी इकाइयों ने समन्वय के साथ काम किया। हमारी प्राथमिकता बिना किसी जान-माल के नुकसान के सभी को सुरक्षित निकालना था, जिसमें सफलता मिली।”

