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हरिद्वार-रुड़की में मसाज पार्लरों का फैलता साम्राज्य, प्रशासनिक कार्रवाई के बावजूद क्यों नहीं लग रही रोक?

हरियाणा व उत्तरप्रदेश के निवासी देवभूमि उत्तराखण्ड के धर्मनगरी हरिद्वार व रुड़की मे फैला रहे मसाज पार्लरो का नेटवर्क.. आखिर देवभूमि कों ही क्यों बना रहे निशाना,

हरिद्वार। देवभूमि उत्तराखण्ड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक पहचान वाले शहर हरिद्वार और रुड़की इन दिनों कथित रूप से मसाज पार्लरों की बढ़ती संख्या और उनसे जुड़ी अवैध गतिविधियों को लेकर चर्चा का विषय बने हुए हैं। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार हरियाणा एवं उत्तर प्रदेश के कुछ लोगों द्वारा हरिद्वार और रुड़की में बड़े पैमाने पर मसाज पार्लरों का नेटवर्क खड़ा किया गया है, जिसके पीछे केवल स्वास्थ्य सेवाएं ही नहीं बल्कि अन्य संदिग्ध गतिविधियों के संचालन की भी आशंका जताई जा रही है।

जानकारी के अनुसार हरिद्वार स्थित पेंटागन मॉल, रुड़की के आरआर सिनेमा क्षेत्र तथा शहर के कई व्यावसायिक इलाकों में बड़ी संख्या में मसाज पार्लर संचालित किए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इनमें से कुछ प्रतिष्ठानों में “क्रॉस मसाज” की आड़ लेकर देह व्यापार जैसे अवैध कार्यों को अंजाम दिया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि जांच एजेंसियों द्वारा की जानी बाकी है, लेकिन समय-समय पर पुलिस द्वारा की गई छापेमारी में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आते रहे हैं।
बताया जाता है कि पिछले कुछ वर्षों में हरिद्वार और रुड़की में पुलिस एवं प्रशासन द्वारा कई बार मसाज पार्लरों पर कार्रवाई की गई है। कई स्थानों से आपत्तिजनक परिस्थितियों में युवक-युवतियों को पकड़ा गया, जबकि कुछ मामलों में संबंधित संचालकों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई भी की गई। इसके बावजूद ऐसे प्रतिष्ठानों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सूत्रों का दावा है कि इन प्रतिष्ठानों के अधिकतर संचालक और संचालिकाएं पहले भी प्रशासनिक कार्रवाई का सामना कर चुके हैं। कुछ लोगों का नाम विभिन्न विवादों और आपराधिक गतिविधियों से भी जुड़ता रहा है। इसके बावजूद नए नामों और नए लाइसेंसों के माध्यम से कारोबार को लगातार विस्तार दिया जा रहा है।
स्थानीय सामाजिक संगठनों और नागरिकों का कहना है कि धर्मनगरी हरिद्वार, जहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु गंगा स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए पहुंचते हैं, वहां इस प्रकार की गतिविधियां प्रदेश की छवि को धूमिल कर रही हैं। लोगों का प्रश्न है कि आखिर देवभूमि उत्तराखण्ड को ही ऐसे नेटवर्क का केंद्र क्यों बनाया जा रहा है और संबंधित विभाग इस पर प्रभावी अंकुश लगाने में अब तक पूरी तरह सफल क्यों नहीं हो पाए हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इन गतिविधियों पर कठोर कार्रवाई नहीं की गई तो भविष्य में यह नेटवर्क और अधिक संगठित रूप ले सकता है। ऐसे में पुलिस, प्रशासन, नगर निकायों और संबंधित विभागों को संयुक्त रूप से अभियान चलाकर मसाज पार्लरों के लाइसेंस, कर्मचारियों के सत्यापन और उनकी गतिविधियों की गहन जांच करनी चाहिए।

विशेषज्ञों के अनुसार “क्रॉस मसाज” को लेकर अक्सर कई तरह के दावे किए जाते हैं, लेकिन उत्तराखण्ड सहित देश के अधिकांश राज्यों में इस नाम से किसी विशेष व्यावसायिक गतिविधि को संचालित करने की अलग से कोई वैधानिक अनुमति उपलब्ध नहीं है। सूत्रों का कहना है कि हरिद्वार और रुड़की में संचालित कई मसाज पार्लर इसी तथाकथित “क्रॉस मसाज” के नाम पर ग्राहकों को आकर्षित करते हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इसी अवधारणा की आड़ में कई स्थानों पर संदिग्ध गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा रहा है। देवभूमि उत्तराखण्ड की धार्मिक एवं सांस्कृतिक गरिमा को देखते हुए नागरिकों का कहना है कि प्रशासन को स्पष्ट रूप से जांच करनी चाहिए कि जिन प्रतिष्ठानों में “क्रॉस मसाज” का प्रचार किया जा रहा है, उनके पास संबंधित विभागों की कौन-कौन सी वैध अनुमतियां हैं और वे किन नियमों के तहत संचालित हो रहे हैं। यदि किसी प्रतिष्ठान द्वारा नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है तो उसके विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जानी चाहिए।

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