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धर्मनगरी हरिद्वार में “स्पा” की आड़ में फैलता हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट !आखिर कौन लोग हैं जो गंगा नगरी को बना रहे जिस्मफरोशी का अड्डा ?

हरिद्वार:पवित्र हरिद्वार पर अश्लील कारोबार का एक ऐसा काला साया, जन्म लें चूका है जिसमे क्षेत्रीय नागरिकों और ख़ासकर युवाओं का भविष्य खतरे में डाल दिया है,

जी हाँ विश्व प्रसिद्ध धार्मिक नगरी हरिद्वार आज एक ऐसे गंदे और शर्मनाक कारोबार की गिरफ्त में आती जा रही है, जिसने धर्मनगरी की छवि को गहरा धक्का पहुँचाना शुरू कर दिया है। गंगा घाटों, मंदिरों और आश्रमों के आस पास के क्षेत्रो मे अब तेजी से ऐसे “स्पा और मसाज पार्लर” जन्म ले चुके हैं, जिन पर लंबे समय से हाई प्रोफाइल सेक्स रैकेट चलाने के गंभीर आरोप लगते रहे हैं।

स्थिति इतनी भयावह बताई जा रही है कि शहर के कई इलाकों में अब “मसाज पार्लर” नाम सुनते ही लोगों के मन में शक पैदा होने लगता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इन सेंटरों में मसाज कम और देहव्यापार का गंदा खेल ज्यादा चल रहा है।

सबसे अधिक चर्चाओं में रहने वाला क्षेत्र सिडकुल का पेंटागन मॉल बताया जाता है, जहाँ वर्षों से कई स्पा सेंटरों को लेकर चर्चाएँ, शिकायतें और विवाद सामने आते रहे हैं। आरोप है कि यहाँ “क्रॉस मसाज” की आड़ में खुलेआम जिस्मफरोशी का कारोबार चलाया जा रहा है और बाहर से आने वाले लोगों को आकर्षित करने के लिए हाई प्रोफाइल माहौल तैयार किया जाता है।

“एंट्री फीस” से शुरू होता है खेल, बंद कमरों में बदल जाता है पूरा माहौल

सूत्रों के अनुसार, इन स्पा सेंटरों में ग्राहक से पहले काउंटर पर 1500 से 3000 रूपये की मोटी रकम ली जाती है। इसे “मसाज चार्ज” या “एंट्री फीस” कहा जाता है। इसके बाद ग्राहक को बंद कमरों में भेजा जाता है, जहाँ कथित तौर पर दोबारा मोटी रकम 3000 से 5000 लेकर “एक्स्ट्रा सर्विस” के नाम पर देहव्यापार का खेल शुरू होता है।

जानकार बताते हैं कि कई जगहों पर महिला कर्मचारियों को विशेष रूप से ग्राहकों को फँसाने और मोटी रकम वसूलने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। बाहर से देखने पर यह सब एक सामान्य स्पा सेंटर जैसा दिखाई देते है, लेकिन अंदर का माहौल पूरी तरह अलग बताया जाता है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह 10 बजे ये खेल शुरू हो जाता है और कई बार देर रात तक संदिग्ध लोगों की इन पार्लरो मे आवाजाही रहती है , बंद कमरों में घंटों ये गतिविधियाँ चलना, पूरे मामले को और ज्यादा संदिग्ध बना देता है।

कौन हैं इस गंदे कारोबार के असली संचालक ?जो देवभूमि उत्तराखंड को कर रहे है कलंकित,

सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर इस पूरे नेटवर्क को चला कौन रहा है ?

सूत्र बताते हैं कि इस कारोबार के पीछे केवल छोटे कर्मचारी नहीं, बल्कि एक संगठित नेटवर्क काम करता है। अधिकतर संचालक उत्तरप्रदेश से आकर हरिद्वार में जिश्म फरोशी के ये कोठे खोल रहे हैं,साथ ही सूत्र ये भी बताते है की ये जितने भी संचालक है वे सभी अपराधिक प्रवर्ती के लोग है जो पहले भी कई बार इसी तरह की अलराधिक अनैतिक व असामाजिक गतिविधियों के चलते जेल की हवा खा चुके है या जिनपर कोर्ट मे किसी न किसी मामले मे मुक़दमे लंबित है,

सच्चाई तो ये है की उत्तरप्रदेश के बदलते व कड़े कानून के चलते ये उत्तराखंड का रुख करने लगे है जबकि स्थानीय स्तर पर उन्हें सहयोग देने वाले लोग भी मौजूद रहते हैं।

बताया जाता है कि इन जगहों पर स्थानीय महिलाओं और युवकों को भी इस नेटवर्क में शामिल किया गया है ताकि इन्हे क्षेत्रीय जानकारी भी मिलती रहे और पुलिस या अन्य गतिविधियों की खबर पहले से इन तक पहुँच सके।

ये लोग सोशल मीडिया, व्हाट्सऐप और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से ग्राहकों तक पहुँच बनाते हैं। “फुल बॉडी मसाज”, “स्पेशल सर्विस”, “VIP ट्रीटमेंट” और “क्रॉस मसाज” जैसे शब्दों के जरिए ग्राहकों को आकर्षित करते है।

पुलिस कार्रवाई के बाद भी दोबारा कैसे खुल जाते हैं सेंटर ?

लोगों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जब समय-समय पर शिकायतें और कार्रवाई होती रहती हैं, तो फिर यही सेंटर कुछ दिनों बाद दोबारा कैसे शुरू हो जाते हैं ?

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि कई बार पुलिस के पहुँचने से पहले ही संचालकों को भनक लग जाती है और वे सेंटर बंद करके फरार हो जाते हैं। कुछ समय बाद मामला शांत होते ही फिर वही कारोबार शुरू हो जाता है।

इसी कारण अब क्षेत्र में यह चर्चा तेज हो चुकी है कि आखिर इन लोगों के हौसले इतने बुलंद क्यों हैं ? क्या इनके साथ कोई बड़ा नेटवर्क काम कर रहा है ? क्या नियमों की आड़ लेकर धर्मनगरी में अनैतिक कारोबार को संरक्षण मिल रहा है ?

इन सवालों ने प्रशासनिक व्यवस्था पर भी कई गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

युवाओं और समाज पर पड़ रहा खतरनाक असर

सामाजिक विशेषज्ञों का मानना है कि जिस प्रकार धार्मिक क्षेत्रों में इस प्रकार के सेक्स रैकेट पनप रहे है , तो इसका सबसे बड़ा असर युवाओं और समाज की मानसिकता पर पड़ रहा है।

आज हरिद्वार शिक्षा, रोजगार और उद्योग का भी बड़ा केंद्र बन चुका है। हजारों युवा यहाँ रहते हैं। ऐसे माहौल में यदि खुलेआम देहव्यापार जैसी गतिविधियाँ बढ़ेंगी, तो अपराध,नशा,ब्लैकमेलिंग और जनता के शोषण जैसी घटनाएँ भी बढ़ सकती हैं।

यह केवल कानून व्यवस्था का मामला नहीं, बल्कि समाज के नैतिक पतन का संकेत भी है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो भविष्य में हरिद्वार की पहचान धर्मनगरी से ज्यादा “स्पा कल्चर” और अनैतिक गतिविधियों के लिए होने लगेगी।

धर्मनगरी की गरिमा बचाने के लिए अब निर्णायक कार्रवाई जरूरी हो चुकी है क्योंकि हरिद्वार करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। यहाँ आने वाला हर श्रद्धालु गंगा और धर्म की पवित्रता महसूस करना चाहता है, न कि शहर के भीतर फैलते अनैतिक कारोबार की दुर्गंध।

अब आवश्यकता है कि प्रशासन केवल औपचारिक कार्रवाई तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसे सभी स्पा और मसाज सेंटरों की गहन जांच कराई जाए। उनके लाइसेंस, कर्मचारियों, गतिविधियों और आर्थिक स्रोतों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

साथ ही समाज को भी जागरूक होना होगा, क्योंकि यदि आज धर्मनगरी को इस दलदल से नहीं निकाला गया, तो आने वाले समय में हालात और ज्यादा भयावह हो सकते हैं।
हरिद्वार की पवित्रता बचाना अब केवल प्रशासन नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी बन चुकी है।

 

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