हरिद्वार(अजय नामदेव): सोमवार सुबह हरिद्वार–देहरादून रेल मार्ग पर बड़ा हादसा हुआ जब हावड़ा-दून एक्सप्रेस (13009) की चपेट में एक शिशु हाथी आ गया। यह दर्दनाक घटना मोतीचूर–रायवाला स्टेशन के बीच राजाजी टाइगर रिजर्व की हरिद्वार रेंज में हुई, जिससे मौके पर ही शिशु हाथी की मौत हो गई।
🚨 हादसे के बाद वंदे भारत ट्रेन रोकी गई
हादसे के तुरंत बाद दिल्ली आनंद विहार जा रही वंदे भारत ट्रेन को रायवाला स्टेशन पर रोकना पड़ा।
वन विभाग ने कार्रवाई करते हुए ट्रेन के लोको पायलट खुशी राम मौर्य और सहायक लोको पायलट दीपक कुमार के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। दोनों को हिरासत में लिया गया है।
⏱ हादसा छह बजकर 31 मिनट पर हुआ
जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह 6:31 बजे हाथियों का झुंड रेलवे ट्रैक पार कर रहा था। उसी समय हावड़ा-दून एक्सप्रेस तेज गति से पहुंची और झुंड के साथ चल रहे लगभग 6–8 वर्ष के शिशु हाथी को टक्कर लग गई।
वन्यजीव प्रतिपालक अजय लिंगवाल ने पुष्टि की कि हादसे को लेकर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
📊 38 साल में 33 हाथियों की मौत – रेलवे ट्रैक बना ‘डेथ कॉरिडोर’
हरिद्वार–देहरादून रेलवे ट्रैक हाथियों के लिए लंबे समय से खतरनाक साबित हो रहा है। पिछले 38 वर्षों में 33 हाथियों की मौत इसी ट्रैक पर हो चुकी है।
प्रमुख घटनाएँ
- 19 सितंबर 2023 – सीतापुर फाटक के पास नर हाथी की मौत
- वर्ष 2021 – दो हाथियों की ट्रेन की चपेट में आकर मौत
- 2020 – नकरौंदा व हर्रावाला के पास दो घटनाएँ
- 2016–17 – रायवाला और ज्वालापुर क्षेत्र में दो टस्कर मरे
- फरवरी–मार्च 2018 – शिशु व मादा हाथी की मौत
- 2001 में एक साथ 4 हाथी ट्रेन से कटकर मरे
यह घटना 2023 के बाद पहली मौत है, जिसने एक बार फिर रेलवे और वन विभाग के सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
🌳 ‘गलियारे से चौकसी गायब’, हादसा जगह पर अक्सर रहता है हाथियों का मूवमेंट
जहां हादसा हुआ वह हाथियों का पारंपरिक वन्यजीव गलियारा है।
स्थानीय वन विभाग पर आरोप है कि यहां गश्त, सायरन सिस्टम और मॉनिटरिंग बढ़ाने के बावजूद ग्राउंड पर पर्याप्त चौकसी नहीं होती।
विशेषज्ञों का कहना है कि:
- हाथियों के मूवमेंट की रियल-टाइम मॉनिटरिंग हो
- रेलवे को अलर्ट सिस्टम सक्रिय रखना चाहिए
- स्पीड कंट्रोल और नाइट पेट्रोल अनिवार्य होना चाहिए
लेकिन धरातल पर यह व्यवस्था प्रभावी नहीं दिखती।

