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6 Nov 2026, Fri

लक्सर भूमि विवाद: अदालत के आदेश से मचा हड़कंप, फर्जीवाड़े के आरोप में FIR के निर्देश

हरिद्वार: लक्सर की एक कृषि भूमि को लेकर लंबे समय से चल रहा विवाद अब गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। मामला कानून, साजिश और धमकियों से जुड़ा हुआ बताया जा रहा है। हाल ही में अदालत के स्पष्ट आदेश के बाद पूरे इलाके में चर्चा तेज हो गई है। प्रार्थी जसजीत सिंह ने आरोप लगाया है कि उनकी माता स्वर्गीय चरणजीत कौर वर्ष 1974 से ग्राम ऐथल बुर्जुग, तहसील लक्सर स्थित खसरा संख्या 66 की करीब 3.98 हेक्टेयर भूमि पर खेती करती आ रही थीं। पहले वे अपने पति के साथ और बाद में बेटे जसजीत सिंह के साथ लगातार इस जमीन पर काबिज रहीं। वर्ष 1995 में चकबंदी न्यायालय, रुड़की ने इस भूमि से शांति शरीफ का नाम हटाकर चरणजीत कौर का नाम राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज किया था। शांति शरीफ की मृत्यु भी उसी वर्ष हो चुकी थी। इसके बाद भूमि को लेकर ग्राम सभा और प्रार्थी परिवार के बीच मुकदमे चले, जो अब भी न्यायालय में लंबित हैं। इस मामले में 19 फरवरी 2024 को चकबंदी न्यायालय ने जमीन के किसी भी तरह के क्रय-विक्रय पर रोक लगा दी थी। यह आदेश आज भी लागू है और इसकी सूचना उप-निबंधक लक्सर को लिखित रूप से दी जा चुकी थी। इसके बावजूद 6 मार्च 2025 की शाम कुछ अज्ञात लोग खेत पर पहुंचे और जमीन को अपनी बताते हुए प्रार्थी को धमकाने लगे। उन्होंने कहा कि यह जमीन अब हिमांशु चौधरी और गीता चौधरी ने खरीद ली है। विरोध करने पर गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी दी गई।

जांच करने पर सामने आया कि शांति शरीफ की मृत्यु के बावजूद उनके नाम से कथित रूप से फर्जी आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य दस्तावेज बनाए गए। आरोप है कि एक महिला को शांति शरीफ बताकर 6 मार्च 2025 को पूरी भूमि का बैनामा करा दिया गया। प्रार्थी ने पहले थाना लक्सर और बाद में एसएसपी हरिद्वार को शिकायत दी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। इसके बाद अधिवक्ता कुणाल शर्मा के माध्यम से अदालत में मामला दाखिल किया गया। सभी जरूरी दस्तावेज और सबूत न्यायालय में पेश किए गए। अदालत ने पुलिस से रिपोर्ट मंगाई, जिसमें साफ हुआ कि अभी तक कोई FIR दर्ज नहीं है। सभी दस्तावेज देखने के बाद न्यायालय ने माना कि मामला संज्ञेय अपराध का है। अंत में अदालत ने आदेश दिया कि धारा 175(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के तहत प्रार्थना पत्र स्वीकार किया जाता है और कोतवाली लक्सर को निर्देश दिए जाते हैं कि मामला दर्ज कर सही तरीके से जांच की जाए। अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या इस कथित फर्जीवाड़े की पूरी सच्चाई सामने आएगी या मामला फिर से लंबी जांच में उलझ जाएगा। लक्सर की इस जमीन पर अब खेती के साथ-साथ सच और झूठ की लड़ाई भी चल रही है।

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