देहरादून:(जीशान मलिक) उत्तराखंड वन विभाग ने वनाग्नि प्रबंधन को और मजबूत करने के लिए ‘फॉरेस्ट फायर उत्तराखंड मोबाइल ऐप’ का उन्नत संस्करण तैयार किया है। चकराता वन प्रभाग द्वारा विकसित इस नए संस्करण में ‘नियर फॉरेस्ट अलर्ट’ का प्रावधान जोड़ा गया है, जिसके जरिए अब आरक्षित वन क्षेत्र के पास निजी और नाप भूमि पर लगने वाली आग की सूचना भी सेटेलाइट से मिल सकेगी। अभी तक FSI द्वारा नासा सेटेलाइट के जरिए सिर्फ आरक्षित वन क्षेत्र और फॉरेस्ट कवर मैप के अंदर के फायर पॉइंट्स की ही सूचना मिलती थी। आरक्षित वन सीमा के पास कृषि भूमि में लगने वाली आग की जानकारी का कोई सिस्टम नहीं था। अब नए फीचर में NASA के MODIS, VIIRS और SNPP सेंसर से प्राप्त सूचना को ‘नियर फॉरेस्ट अलर्ट’ के नाम से ऐप पर दिखाया जाएगा। 
इस पायलट प्रोजेक्ट से दो बड़े फायदे होंगे। पहला, निजी भूमि में आग से फैलने वाली वनाग्नि के क्षेत्रों की पहचान कर वन अपराधों की जांच में मदद मिलेगी। दूसरा, उन गांवों को चिन्हित किया जा सकेगा जहां बार-बार वन क्षेत्र के पास आड़ा जलाया जाता है, ताकि प्राथमिकता के आधार पर जन जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा सकें।फिलहाल इस तकनीक का ट्रायल टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग और जोशीमठ वन प्रभागों में किया जा रहा है। फील्ड वेरिफिकेशन के बाद इसे पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। इस ऐप की खास बात यह भी है कि वन अग्नि काल में संबंधित ग्राम प्रधानों और राजस्व विभाग के कर्मचारियों को भी खेत/निजी भूमि में आड़ा जलने की सूचना तुरंत मिल जाएगी, जिससे समय रहते आग पर काबू पाया जा सकेगा।वन विभाग 2024-25 से ‘फॉरेस्ट फायर उत्तराखंड मोबाइल ऐप’ का इस्तेमाल वनाग्नि प्रबंधन में कर रहा है। अब इसके अपग्रेडेड वर्जन से जंगलों के पास होने वाली घटनाओं पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी।

