मेरठ:(जीशान मलिक) मेरठ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित मेट्रो रेल उद्घाटन कार्यक्रम के मद्देनज़र, समाजवादी पार्टी मोदीनगर (57) के विधानसभा अध्यक्ष देवव्रत धामा को कल शाम से उनके आवास पर हाउस अरेस्ट कर दिया गया है। यह कार्रवाई तब की गई जब धामा प्रधानमंत्री को राष्ट्रीय मुद्दों से संबंधित ज्ञापन सौंपने की तैयारी में थे।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में शांतिपूर्ण ढंग से ज्ञापन देना नागरिकों का अधिकार है। इस प्रकार की कार्यवाही लोकतांत्रिक मूल्यों पर प्रश्नचिन्ह खड़ा करती है और इन हरकतों से समाजवादी पीछे हटने वाले नहीं हैं और जनता जनार्दन भी अब इस सरकार को समझ चुकी हैं। मोदी सरकार के पाप का घड़ा भर चुका है।
देवव्रत धामा ने सरकार को अल्टीमेटम दिया कि इन मुद्दों से सरकार का पीछा छूटने वाला नहीं है ना हम छूटने देंगे। मोदीनगर में आंदोलन को और गति दी जाएगी।
आज सुबह से पूर्व सभासद सावित्री धामा, पूर्व जिला पंचायत प्रत्याशी राजेश जाटव, मनजीत नेहरा, उत्तम त्यागी, सचिन भारद्वाज, कृपाल सिंह यादव, अभिषेक खन्ना, महिला प्रकोष्ठ की विधानसभा अध्यक्ष शायदा बेगम, पूर्व जिलाध्यक्ष कमलेश चौधरी, रिजवान कस्सार, शोएब मलिक, गौरव अधाना, नजमु मलिक, बादल अली, मुनीश ठेकेदार, मोनू मलिक, विनोद कुशवाह, प्रिंस चौधरी, वरुण त्यागी, अभी त्यागी, दीपक, मोहसिन, शाहबाज, सूरज, गौरव गुर्जर सहित अनेक कार्यकर्ता धामा जी के साथ शांतिपूर्ण रूप से लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा हेतु संघर्षरत हैं।
“हम प्रशासन से मांग करते हैं…
– Jeffrey Epstein प्रकरण से जुड़े अंतरराष्ट्रीय खुलासों पर सरकार स्थिति स्पष्ट करे।
– संयुक्त राज्य अमेरिका के साथ संभावित व्यापार समझौते में किसानों, लघु उद्योगों और एमएसएमई के हितों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
– पूर्व सेना प्रमुख Manoj Mukund Naravane की पुस्तक में उठे संकेतों के संदर्भ में चीन सीमा (LAC) की वास्तविक स्थिति पर पारदर्शी जानकारी दी जाए।
– देश में महिलाओं के लापता होने के बढ़ते मामलों पर विशेष राष्ट्रीय कार्रवाई की जाए।
– युवाओं के लिए ठोस और समयबद्ध रोजगार योजना बनाई जाए।
मांग: उक्त विषयों पर संसद में चर्चा, श्वेत पत्र जारी करने एवं ठोस कार्ययोजना की घोषणा करने की मांग की। साथ ही आशा जताई कि सरकार विकास के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगी।
शांतिपूर्ण ज्ञापन देने के लोकतांत्रिक अधिकार का सम्मान किया जाए। राजनीतिक मतभेदों के आधार पर दमनात्मक कार्यवाही बंद की जाए।समाजवादी पार्टी यह स्पष्ट करती है कि लोकतंत्र में असहमति का अधिकार संविधान द्वारा प्रदत्त है, और शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखना कोई अपराध नहीं है।

