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20 Apr 2026, Mon

हरिद्वार ज़मीन घोटाले में धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 12 अफसर सस्पेंड, जांच अब विजिलेंस के हवाले

हरिद्वार ज़मीन घोटाले में धामी सरकार की बड़ी कार्रवाई, 12 अफसर सस्पेंड, जांच अब विजिलेंस के हवाले

हरिद्वार ,भगवा सनातन टाइम्स

हरिद्वार ज़मीन घोटाले में उत्तराखंड की धामी सरकार ने अब तक की सबसे बड़ी और निर्णायक कार्रवाई करते हुए दो IAS, एक PCS समेत कुल 12 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भ्रष्टाचार के खिलाफ ज़ीरो टॉलरेंस नीति के तहत यह कड़ा कदम उठाया है। इस मामले की जांच अब विजिलेंस विभाग को सौंपी गई है।

54 करोड़ के ज़मीन सौदे ने खोले भ्रष्टाचार के दरवाज़े

मामला हरिद्वार नगर निगम द्वारा कूड़े के ढेर के पास स्थित अनुपयुक्त कृषि भूमि को 54 करोड़ रुपये में खरीदने से जुड़ा है। न भूमि की आवश्यकता थी, न ही प्रक्रिया पारदर्शी थी। बिना उचित मूल्यांकन और टेंडर प्रक्रिया के यह सौदा किया गया, जिससे शासन में हड़कंप मच गया।

इन वरिष्ठ अधिकारियों पर गिरी गाज:

कर्मेन्द्र सिंह, जिलाधिकारी हरिद्वार — भूमि क्रय की अनुमति देने में संदेहास्पद भूमिका।

वरुण चौधरी, पूर्व नगर आयुक्त — बिना प्रक्रिया के प्रस्ताव पास कर घोटाले में प्रमुख भूमिका।

अजयवीर सिंह, एसडीएम — निरीक्षण और सत्यापन में गंभीर लापरवाही।

तीनों अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से हटाते हुए विभागीय जांच प्रारंभ कर दी गई है।

अन्य निलंबित अधिकारी:

निकिता बिष्ट (वरिष्ठ वित्त अधिकारी, नगर निगम हरिद्वार)

विक्की (वरिष्ठ वैयक्तिक सहायक)

राजेश कुमार (रजिस्ट्रार कानूनगों)

कमलदास (मुख्य प्रशासनिक अधिकारी, तहसील हरिद्वार)

इन सभी को प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।

पहले ही हो चुकी हैं ये कार्रवाइयाँ:

जांच शुरू होने के बाद पहले चरण में इन अधिकारियों पर भी कार्रवाई हो चुकी है:

रविंद्र कुमार दयाल, प्रभारी सहायक नगर आयुक्त

आनंद सिंह मिश्रवाण, प्रभारी अधिशासी अभियंता

लक्ष्मीकांत भट्ट, कर एवं राजस्व अधीक्षक

दिनेश चंद्र कांडपाल, अवर अभियंता

इसके अलावा, संपत्ति लिपिक वेदवाल का सेवा विस्तार समाप्त कर दिया गया है, और उन पर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री धामी की सख्त चेतावनी: “न कोई बचेगा, न कोई छिपेगा”

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा, “यह कार्रवाई केवल एक घोटाले की जांच नहीं, बल्कि एक नई प्रशासनिक संस्कृति की शुरुआत है। अब उत्तराखंड में पद नहीं, कर्तव्य और जवाबदेही ही महत्वपूर्ण हैं।”

सरकार ने यह साफ संदेश दिया है कि चाहे कोई अधिकारी कितना भी वरिष्ठ हो, जनहित की अनदेखी और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई तय है।

•पहली बार किसी भूमि घोटाले में इतने वरिष्ठ अधिकारियों पर एक साथ कार्रवाई।

•मुख्यमंत्री ने व्यक्तिगत रूप से रिपोर्ट मंगाकर निर्णय लिया।

•विजिलेंस जांच से यह मामला अब और गहराई से परखा जाएगा।

•प्रशासनिक तंत्र को साफ-सुथरा बनाने का एक निर्णायक प्रयास।

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