
दिल्ली:(जीशान मलिक)सुप्रीम कोर्ट में यूजीसी के नए भेदभाव विरोधी नियमों पर सुनवाई के दौरान विष्णु शंकर जैन ने कहा कि इन नियमों से समाज में विभाजन और वैमनस्य बढ़ सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के पहले के फैसलों में समानता की जो व्यापक व्याख्या की गई है, यूजीसी के नए नियम उससे मेल नहीं खाते।
याचिकाकर्ता का कहना है कि नए नियम सामान्य वर्ग के छात्रों के साथ भेदभाव की स्थिति पैदा कर सकते हैं और नियमों की भाषा और प्रक्रिया स्पष्ट नहीं है, जिससे उनका दुरुपयोग आसान हो सकता है। कई राज्यों में छात्रों ने विरोध प्रदर्शन भी शुरू कर दिए हैं, जो इस बात की गवाही देते हैं कि ये नियम कितने संवेदनशील हैं।
UGC के नए नियमों के तहत सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता समितियों का गठन अनिवार्य किया गया है, जिसमें ओबीसी, एससी, एसटी, महिलाओं और दिव्यांगों का प्रतिनिधित्व जरूरी बताया गया है। लेकिन आलोचकों का आरोप है कि इस ढांचे में सामान्य वर्ग के छात्रों को शामिल नहीं किया गया, जिससे उन्हें पहले से दोषी मानने जैसी स्थिति बनती है।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस ज्योमाल्या बागची की पीठ ने सभी दलीलों को ध्यान से सुना। अदालत के सामने मुख्य सवाल यही रखा गया कि क्या भेदभाव की परिभाषा इतनी सीमित होनी चाहिए या फिर इसे सभी छात्रों के अधिकारों और सुरक्षा को ध्यान में रखकर व्यापक बनाया जाना चाहिए।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भरोसा दिलाया है कि नियमों का दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा और किसी भी छात्र के साथ भेदभाव नहीं होगा। अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई पर सबकी नजर है, जहां तय होगा कि UGC के ये नियम किस रूप में आगे बढ़ेंगे।

