Breaking
20 Apr 2026, Mon

संसद में 131वां संशोधन बिल गिरा, बढ़ी सियासी रार! 11 साल में पहली बार सरकार को झटका

नई दिल्ली:(जीशान मलिक)संसद के मानसून सत्र में सरकार को बड़ा झटका लगा है। बहुचर्चित 131वां संविधान संशोधन विधेयक लोकसभा में जरूरी दो-तिहाई बहुमत न जुटा पाने के कारण गिर गया। 11 साल में यह पहला मौका है जब मोदी सरकार किसी बिल को पास कराने में नाकाम रही है। बिल गिरते ही सियासी घमासान शुरू हो गया है।

“जाने क्या था 131वां संशोधन बिल?

सरकार ने यह विधेयक “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” में संशोधन के लिए पेश किया था। सरकार का दावा था कि इस संशोधन से लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% आरक्षण के प्रावधान को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही परिसीमन के बाद सीटों के रोटेशन और एससी-एसटी महिलाओं के कोटे को लेकर स्पष्टीकरण जोड़ा जाना था।विधि मंत्री ने बिल पेश करते हुए कहा था कि यह “महिलाओं को उनका हक दिलाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम” है।

“सदन में क्या हुआ?

लोकसभा में बिल पर 7 घंटे लंबी बहस चली। संविधान संशोधन के लिए सदन की कुल सदस्य संख्या का बहुमत और मौजूद-वोटिंग करने वाले सदस्यों का दो-तिहाई समर्थन जरूरी होता है। वोटिंग के समय सरकार बहुमत तो जुटा ले गई, लेकिन दो-तिहाई का आंकड़ा नहीं छू पाई। विपक्ष ने वोटिंग के समय वॉकआउट नहीं किया और एकजुट होकर विरोध में वोट डाला। नतीजा: बिल 278-176 के अंतर से गिर गया। संशोधन के लिए 362 वोट चाहिए थे।”विपक्ष बोला- रणनीतिक जीत, सरकार बोली- महिला विरोधी”

कांग्रेस नेता ने कहा, “यह विपक्षी एकता की जीत है। सरकार बिना चर्चा, बिना आम सहमति के बिल थोपना चाहती थी। हमने महिला आरक्षण का विरोध नहीं किया, बल्कि सरकार की जल्दबाजी और खामियों का विरोध किया। बिल में ओबीसी महिलाओं के आरक्षण का जिक्र तक नहीं था।”

समाजवादी पार्टी प्रमुख ने इसे “पीडीए की जीत” बताया। कहा, “सरकार दलित, पिछड़ी महिलाओं को हक नहीं देना चाहती। हम पहले दिन से जातिगत जनगणना और ओबीसी कोटा की मांग कर रहे हैं।”_

वहीं सरकार ने पलटवार किया। संसदीय कार्य मंत्री ने कहा, “कांग्रेस और उसके साथियों ने आज महिला विरोधी चेहरा दिखा दिया। 11 साल में पहली बार इन्होंने महिलाओं के अधिकार का बिल गिराया है। देश देख रहा है कि कौन महिला सशक्तिकरण चाहता है और कौन सिर्फ सियासत।”भाजपा ने आरोप लगाया कि विपक्ष ने “तकनीकी आधार पर अड़ंगा लगाकर” बिल गिराया।

11 साल बाद पहली नाकामयाबी क्यों है बड़ी बात?

2014 से अब तक मोदी सरकार ने 75 से ज्यादा बिल पास कराए हैं। नोटबंदी, जीएसटी, 370, CAA, कृषि कानून जैसे विवादित बिल भी संख्या बल पर पास हो गए थे। राज्यसभा में कमजोर स्थिति के बावजूद लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के दम पर सरकार संविधान संशोधन तक पास कराती रही।

लेकिन 131वां संशोधन बिल पहली बार लोकसभा में ही गिर गया। राजनीतिक जानकार इसे 2026 के यूपी समेत 5 राज्यों के चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले विपक्षी एकजुटता का संकेत मान रहे हैं।फिलहाल संसद में बिल गिरने से सियासी पारा चढ़ गया है। 11 साल बाद सरकार की यह नाकामयाबी आने वाले दिनों में विपक्ष को नई ऊर्जा दे सकती है।

By zeeshan

Zeeshan डिजिटल मीडिया से जुड़े युवा पत्रकार हैं। वे Bhagwasanatantimes.com के साथ कार्यरत हैं और राजनीति, समाज, धर्म और समसामयिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग करते हैं। डिजिटल पत्रकारिता में उनकी गहरी रुचि है, और वे निष्पक्ष और तथ्यात्मक खबरों के लिए जाने जाते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *