नई दिल्ली:(जीशान मलिक)इस्लाम के पांच अरकान में से एक अहम रुक्न “हज” के लिए दुनिया भर से 15 लाख से ज्यादा मुसलमान सऊदी अरब पहुंच चुके हैं। सोमवार 25 मई से हज के मुख्य अरकान की आधिकारिक शुरुआत हो गई है। हज के रस्म-ओ-रिवाज बकरीद के एक दिन बाद, यानी 29 मई को पूरे होंगे।ईरान-इजरायल युद्ध के बीच घोषित अस्थिर संघर्ष-विराम और पूरे मिडिल ईस्ट में बने तनाव व अनिश्चितता के माहौल के बावजूद लाखों अकीदतमंद हज के लिए मक्का-मदीना पहुंचे हैं। मिस्र की तीर्थयात्री साम्या अब्दुल मोनीम ने भावुक होते हुए कहा “अल्लाह का लाख-लाख शुक्र है कि इन हालात में भी मैं हज पर पहुंच पाई। ये मेरे लिए जिंदगी का सबसे बड़ा तोहफा है।”
हज हर उस मुसलमान पर जिंदगी में एक बार फर्ज है जो शारीरिक और आर्थिक रूप से सक्षम हो। कई अकीदतमंद सालों तक पैसे जोड़ते हैं, दुआ करते हैं और परमिट का इंतजार करते हैं। इंडोनेशिया, भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत 180 से ज्यादा देशों से जायरीन पहुंचे हैं।मक्का में तापमान 45 से 50 डिग्री तक पहुंच रहा है। भीषण गर्मी में धार्मिक रस्में निभाने के लिए जायरीन छतरियां, हाथ वाले पंखे और ठंडे पानी की बोतलें साथ रख रहे हैं। सऊदी सरकार और स्वयंसेवकों ने जगह-जगह वॉटर मिस्ट फैन, छायादार टेंट और पानी की मुफ्त बोतलों का इंतजाम किया है ताकि किसी को डिहाइड्रेशन न हो। पिछले साल गर्मी से सैकड़ों मौतों के बाद इस बार स्वास्थ्य इंतजाम सख्त हैं।
दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले इंडोनेशिया ने हज से पहले इमरजेंसी प्लान लागू किया है। सरकार ने साफ किया है कि यात्रा का अतिरिक्त खर्च जायरीनों पर नहीं डाला जाएगा। वहीं भारत में, जहां से करीब 1.75 लाख हज यात्री गए हैं, ईंधन की बढ़ी कीमतों की वजह से हज का खर्च पिछले साल के मुकाबले बढ़ गया है। फिर भी तीर्थयात्रा सामान्य रूप से चल रही है।

