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रुड़की में गूंजे नारे, पत्रकारों का उबाल—विधायक के खिलाफ मोर्चा गरमाया!

रुड़की:(ज़ीशान मलिक)17 मार्च 2025—शहर में सोमवार की दोपहर एक अलग ही माहौल था। पत्रकारों की भारी भीड़, काली पट्टियों से बंधे हाथ, गूंजते नारे और चेहरे पर आक्रोश की लपटें…। नगर निगम की बोर्ड बैठक में तीन मार्च को हुए घटनाक्रम ने आज पूरे शहर को हिला कर रख दिया था।

नगर के पत्रकार मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपने के लिए एकजुट हुए थे। उनके विरोध का केंद्र थे भाजपा विधायक प्रदीप बत्रा, जिन पर पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की और अभद्रता करने का आरोप था। पत्रकारों ने नगर निगम की बैठक में मीडिया कवरेज पर लगाए गए प्रतिबंध को लेकर स्वतंत्र पत्रकारिता पर हमला करार दिया और विधायक के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

विधायक के खिलाफ बढ़ता विरोध, मेयर का झुका सिर

तीन मार्च की घटना के बाद से ही नगर के पत्रकारों ने विरोध का बिगुल फूंक दिया था। विधायक पर लगे आरोपों के बाद पत्रकारों ने कड़ा रुख अपनाया, जिसका असर मेयर तक पहुंचा। उन्होंने पत्रकारों के सम्मान को ठेस पहुंचाने के लिए खेद प्रकट कर माफी मांग ली, लेकिन विधायक के खिलाफ नाराजगी कम नहीं हुई।

पत्रकारों का कारवां प्रेस क्लब से शहीद चंद्रशेखर चौक, सिविल लाइन, रुड़की टॉकीज से होते हुए पुरानी तहसील स्थित एसडीएम कार्यालय पहुंचा। वहां उन्होंने ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आशीष मिश्रा को मुख्यमंत्री और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपा।

पत्रकारों ने चेतावनी दी कि अगर लोकतंत्र के चौथे स्तंभ का सम्मान नहीं हुआ तो विरोध और तेज होगा। इसी क्रम में सीतापुर में राष्ट्रीय अखबार के पत्रकार राघवेंद्र वाजपेयी की हत्या पर भी रोष जताया गया और देशभर में पत्रकारों की सुरक्षा की मांग की गई।

“पत्रकारों का सम्मान सर्वोपरि”—प्रेस क्लब अध्यक्ष की हुंकार

 

प्रेस क्लब अध्यक्ष बबलू सैनी ने कहा, “पत्रकार समाज का दर्पण होते हैं। यदि उनके साथ दुर्व्यवहार होगा, तो यह लोकतंत्र पर हमला माना जाएगा। पत्रकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए, ताकि वे निर्भय होकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकें।”

 

प्रशासन ने दिया आश्वासन, लेकिन क्या होगा अगला कदम?

 

ज्वाइंट मजिस्ट्रेट आशीष मिश्रा ने प्रदर्शनकारी पत्रकारों को आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को मुख्यमंत्री तक पहुंचाया जाएगा और उचित कार्रवाई पर विचार होगा। लेकिन क्या यह आश्वासन पत्रकारों के गुस्से को शांत कर पाएगा?

 

विरोध का आगाज, क्या होगा अंजाम?

 

यह विरोध सिर्फ रुड़की तक सीमित रहेगा या पत्रकार इसे प्रदेश और देशव्यापी आंदोलन का रूप देंगे? क्या विधायक माफी मांगेंगे, या यह टकराव और बढ़ेगा?

 

आने वाले दिनों में रुड़की की सियासत गरमाने वाली है, क्योंकि यह लड़ाई सिर्फ एक विधायक के खिलाफ नहीं, बल्कि पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सम्मान की है!

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