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“रहमतपुर बेलड़ा गांव मे एम.एस.पब्लिक स्कूल कक्षा 12 तक खुलने से छात्रों-छात्राओं क़ो मिली बड़ी राहत”

पिरान कलियर:(ज़ीशान मलिक)रहमतपुर गांव में उम्मीद की एक किरण: जहां अंधेरे में डूबते सपनों को मिली नई रौशनी। बच्चों के सपनों को पंख तो थे, मगर उड़ान के लिए आसमान नहीं। रहमतपुर गांव में सरकारी स्कूल सिर्फ कक्षा 8 तक ही था।उसके बाद एक लंबा, थकाऊ और खतरों से भरा सफर… खासकर लड़कियों के लिए, जिनके लिए यह सफर कभी-कभी डरावना भी बन जाता।

बारिश की तेज़ बौछारों के बीच, कीचड़ से लथपथ रास्ते, और माता-पिता की आंखों में हर शाम तक लौटने की दुआ… यही थी रहमतपुर की सच्चाई। कई लड़कियों की पढ़ाई इन्हीं रास्तों में कहीं खो जाती थी। कुछ डर के मारे, तो कुछ मजबूरी के आगे झुककर हमेशा के लिए किताबों से दूर हो जाती थीं।

लेकिन अब, इस गांव में एक नई सुबह ने दस्तक दी है—एम.एस. पब्लिक स्कूल का उद्घाटन हुआ है, वो भी कक्षा 12 तक। यह सिर्फ एक स्कूल नहीं… यह एक ख्वाब है, जो अब ज़मीन पर उतर चुका है।

स्कूल की प्रिंसिपल रेनू गोस्वामी ने बताया, “हमने सालों से इस दर्द को देखा है… बच्चों की आँखों में पढ़ने की चाहत, लेकिन हालात की जंजीरों में जकड़े सपने। यही वजह थी कि हमने इस स्कूल की नींव रखी।हम चाहते है हर बच्चे क़ो सिक्षा मिले”

वाइस प्रिंसिपल सीमा गोस्वामी ने भी अपनी बात रखी, “सरकार शिक्षा के लिए लगातार प्रयास कर रही है। हमारा भी कर्तव्य है कि हम अपने बच्चों को शिक्षित करें। खासकर बेटियों को, जो आज हर क्षेत्र में इतिहास लिख रही हैं।”

आज, रहमतपुर की गलियों में सिर्फ बच्चों की हँसी नहीं गूंज रही—बल्कि एक विश्वास भी हवा में तैर रहा है। अब कोई बेटी अधूरी नहीं रहेगी, अब कोई सपना अधूरा नहीं रहेगा।

क्योंकि स्कूल अब दूर नहीं, गांव के बिल्कुल पास है—सपनों के एकदम करीब।

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