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पांच दिन में सुलझा था ब्लाइंड पॉक्सो केस, पांचों दोषियों को उम्रकैद

रुड़की:(जीशान मलिक)वर्ष 2022 में सामने आए एक चुनौतीपूर्ण ब्लाइंड दुष्कर्म एवं पॉक्सो प्रकरण में हरिद्वार पुलिस की तफ्तीश आखिरकार न्यायालय तक पहुंची। पुलिस टीम ने महज पांच दिनों में सीसीटीवी फुटेज, डम्प डाटा, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस और मानवीय सूचना तंत्र की मदद से घटना की कड़ियां जोड़ते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया था। मामले में विवेचना के बाद आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। अब न्यायालय ने मामले में पांचों दोषियों को आजीवन कारावास तथा अर्थदंड से दंडित किया है।मामला 24 जून 2022 की मध्यरात्रि का है। डायल-112 के माध्यम से कोतवाली रुड़की पुलिस को सूचना मिली थी कि ग्राम ढंडेरी ख्वाजगीपुर के पास हाईवे किनारे एक कार सवार व्यक्ति अथवा व्यक्तियों द्वारा एक बच्ची को छोड़कर फरार हो गए हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और बच्ची को एंबुलेंस के माध्यम से अस्पताल पहुंचाया गया। चिकित्सकों से समन्वय कर तत्काल उपचार शुरू कराया गया।प्रारंभिक जानकारी में पीड़िता की मां ने ‘सोनू’ नामक व्यक्ति पर अपराध किए जाने की बात बताई। मामले की गंभीरता को देखते हुए कोतवाली रुड़की में मुकदमा अपराध संख्या 475/2022 दर्ज कर जांच शुरू की गई।

घटना की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन पुलिस उपमहानिरीक्षक/वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक हरिद्वार डॉ. योगेंद्र सिंह रावत के निर्देश पर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण प्रमेन्द्र डोबाल ने विशेष टीम गठित की। टीम में क्षेत्राधिकारी मंगलौर पंकज गैरोला, क्षेत्राधिकारी रुड़की विवेक कुमार, प्रभारी निरीक्षक रुड़की देवेंद्र सिंह चौहान, सीआईयू रुड़की प्रभारी समेत उपनिरीक्षक और अनुभवी पुलिसकर्मी शामिल किए गए।जांच के दौरान अधिकारियों और टीमों के बीच तत्काल सूचनाओं के आदान-प्रदान तथा बेहतर समन्वय के लिए व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया।मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती घटना की परिस्थितियों, संदिग्ध ‘सोनू’ और वारदात में इस्तेमाल वाहन की पहचान करना था। पीड़िता की मां सदमे की स्थिति में होने के कारण घटना के संबंध में स्पष्ट जानकारी देने की स्थिति में नहीं थी।

पुलिस ने संवेदनशीलता के साथ काउंसलिंग और संवाद के माध्यम से जानकारी जुटाई। इसके साथ ही घटनास्थल और संभावित मार्गों की मैपिंग करते हुए सीसीटीवी फुटेज और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस को समानांतर रूप से खंगाला गया।जांच के दौरान 200 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का बारीकी से विश्लेषण किया गया। फुटेज में पीड़िता अपनी बच्ची के साथ रुड़की क्षेत्र में दिखाई दी। बाद में एक व्यक्ति के साथ मोटरसाइकिल पर जाते हुए भी वह दिखाई दी, लेकिन आगे कैमरे उपलब्ध नहीं होने के कारण जांच टीम को अन्य तकनीकी साक्ष्यों का सहारा लेना पड़ा।

“‘सोनू’ से खुली आगे की राह!!

जांच के दौरान ‘सोनू’ की पहचान महक सिंह उर्फ सोनू के रूप में हुई, जो रुड़की के एक शोरूम में कार्यरत था। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तथा पीड़िता से पहचान कराई। इसके बाद घटना में प्रयुक्त सफेद रंग की ऑल्टो कार और उसमें शामिल अन्य लोगों की तलाश तेज की गई।पीड़िता द्वारा कार पर लगे सफेद-हरे रंग के झंडे की जानकारी भी जांच में महत्वपूर्ण कड़ी बनी। उस दौरान क्षेत्र में किसान रैली आयोजित होने के कारण इस तरह के झंडे लगी कई गाड़ियां मौजूद थीं। पुलिस ने घटनास्थल और संभावित मार्गों का डम्प डाटा जुटाकर संदिग्ध मोबाइल नंबरों के रूट मैप का सीसीटीवी फुटेज से मिलान किया।इसी प्रक्रिया में संदिग्ध सफेद रंग की ऑल्टो कार की गतिविधियों को ट्रेस किया गया। महक सिंह उर्फ सोनू द्वारा बताए गए वाहन नंबर UP12R-5646 का तकनीकी साक्ष्यों और सीसीटीवी फुटेज से मिलान किया गया। वाहन राजीव कुमार निवासी बेलड़ा, मुजफ्फरनगर के नाम पर पंजीकृत पाया गया।

“इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस से पांचों तक पहुंची पुलिस”

सीआईयू और पुलिस टीमों ने इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, मुखबिर तंत्र तथा अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों की तलाश शुरू की। पुलिस ने अलग-अलग स्थानों से पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया।गिरफ्तार आरोपियों में महक सिंह उर्फ सोनू निवासी इमलीखेड़ा, थाना पिरान कलियर; राजीव कुमार उर्फ विक्की तोमर निवासी बेलड़ा, थाना भोपा, मुजफ्फरनगर; सोनू तेजियान निवासी साल्हापुर, थाना देवबंद, सहारनपुर; सुबोध कुमार निवासी बेलहना, थाना भोपा, मुजफ्फरनगर तथा जगदीश निवासी साल्हापुर, थाना देवबंद, सहारनपुर शामिल थे।पुलिस के अनुसार आरोपियों की निशानदेही पर मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य बरामद किए गए। घटना में प्रयुक्त ऑल्टो कार की फील्ड यूनिट से जांच कर आवश्यक नमूने भी संकलित किए गए, जिन्हें विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेजा गया।विवेचना के दौरान एकत्र किए गए साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप-पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने उपलब्ध साक्ष्यों और दोनों पक्षों की दलीलों पर विचार करने के बाद पांचों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।

“पांच दिन में हुआ था मामले का खुलासा…

हरिद्वार पुलिस के अनुसार वर्ष 2022 में सामने आए इस ब्लाइंड केस का पांच दिनों के भीतर सफल अनावरण किया गया था। जांच में सीसीटीवी फुटेज, डम्प डाटा, इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, फील्ड यूनिट और मानवीय सूचना तंत्र का समन्वित इस्तेमाल किया गया।पुलिस के मुताबिक इस प्रकरण में जांच के दौरान किसी एक संदिग्ध साक्ष्य को अंतिम निष्कर्ष मानने के बजाय उसकी स्वतंत्र तस्दीक की गई। घटनास्थल से लेकर संदिग्धों की गतिविधियों और संभावित मार्गों की अलग-अलग स्तर पर जांच की गई, जिसके बाद मामले की कड़ियां एक-दूसरे से जुड़ती चली गईं।

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