Site icon Bhagwa Sanatan Times

पतंजलि विश्वविद्यालय में 52वां अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ संपन्न

हरिद्वार:(चीफ एडिटर) पतंजलि विश्वविद्यालय में आयोजित तीन दिवसीय 52वां अखिल भारतीय प्राच्य विद्या सम्मेलन शनिवार को ऐतिहासिक उपलब्धियों के साथ संपन्न हो गया। पतंजलि विश्वविद्यालय, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और भारतीय विद्वत् परिषद के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस सम्मेलन में सनातन, योग, आयुर्वेद, संस्कृत और एआई पर मंथन हुआ।समापन समारोह में योगगुरु स्वामी रामदेव, आचार्य बालकृष्ण और प्रदेश के कैबिनेट मंत्री प्रदीप बत्रा सहित देशभर के 40 से अधिक संत और 32 कुलपति मौजूद रहे।

स्वामी रामदेव ने कहा कि ब्राह्मण, क्षत्रिय, वैश्य और शूद्र जातियां नहीं, बल्कि गुण और कर्म के प्रतीक हैं। उन्होंने भारतीय पंचांग और विक्रम संवत को राष्ट्रीय जीवन में व्यापक रूप से अपनाने पर जोर दिया। कहा कि सनातन केवल धर्म नहीं, बल्कि मानव कल्याण का दर्शन है।आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि पतंजलि में सनातन को लेकर इतिहास रचा गया। सभी मत-पंथ के संतों को एक मंच पर लाकर ‘सनातन शास्त्र शुद्धि समिति’ का गठन किया गया। उन्होंने बताया कि सम्मेलन में 35 पुस्तकों का विमोचन हुआ और 92 पुस्तक स्टॉल लगाए गए।

सम्मेलन अध्यक्ष श्रीनिवास वरखेड़ी ने स्वामी रामदेव को ‘विद्याधिपति-प्रशस्ति-पत्रम्’ भेंट किया। आचार्य बालकृष्ण को ‘महामहोपाध्याय’, साध्वी देवप्रिया को ‘महाआचार्या’ और डॉ. शिवानी को ‘व्याकरण पण्डिता’ सम्मान दिया गया। 24 विद्वानों को सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार दिए गए। प्रो. अरुण रंजन मिश्रा को सम्मेलन का नया अध्यक्ष मनोनीत किया गया।मंत्री प्रदीप बत्रा ने कहा कि पतंजलि में बच्चों को मिल रहे संस्कार किसी स्वप्न के साकार होने जैसे हैं।सम्मेलन में 26 राज्यों के करीब 1800 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जिसमें 552 शिक्षक, 467 शोधार्थी और 403 विद्यार्थी शामिल रहे।

Exit mobile version