
देहरादून:(जीशान मलिक) उत्तराखंड सरकार एक बार फिर सीधे जनता के बीच पहुंचने जा रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर 4 जुलाई से पूरे प्रदेश में 15 दिन तक चलने वाला ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ अभियान शुरू किया जाएगा। इस अभियान का मकसद है, लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाकर, उनके ब्लॉक और तहसील में ही समस्याओं का समाधान देना।प्रदेश सरकार ने तय किया है कि इस बार जिला, ब्लॉक और तहसील स्तर पर बड़े-बड़े विशेष शिविर लगाए जाएंगे। इन शिविरों में राजस्व, स्वास्थ्य, शिक्षा, समाज कल्याण,सहित सभी संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहेंगे।
शिविर में आने वाले हर नागरिक की शिकायत मौके पर सुनी जाएगी और यथासंभव तुरंत निस्तारण किया जाएगा। इसके साथ ही पात्र लोगों को पेंशन, आयुष्मान, आवास, ऋण, छात्रवृत्ति जैसी विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ भी शिविर स्थल से ही दिया जाएगा।मुख्यमंत्री धामी लगातार कहते हैं कि सुशासन का मतलब है लोगों को राहत बिना भागदौड़ के मिले। इसी विचार को आगे बढ़ाते हुए दिसंबर 2025 में 45 दिन का पहला ‘जन-जन की सरकार’ अभियान चलाया गया था। अब मुख्यमंत्री जी के कार्यकाल के सफल 5 वर्ष पूरे होने और 4 जुलाई से शुरू हो रहे ‘सेवा पखवाड़ा’ के अवसर पर इसका दूसरा चरण लॉन्च किया जा रहा है।
पिछले 45 दिन के अभियान के आंकड़े खुद इसकी सफलता बताते हैं। कुल शिविर:68,जनभागीदारी:5,33,452 से अधिक नागरिक सीधे शिविरों में पहुंचे।ओर समाधान लगभग 33,000 जन शिकायतों का त्वरित निपटारा हुआ।इस पारदर्शी और जनकेंद्रित मॉडल को गवर्नेंस की बेस्ट प्रैक्टिस के रूप में भी सराहा गया।
सरकार ने सभी जिलाधिकारियों और विभागाध्यक्षों को निर्देश दिए हैं कि अभियान अवधि में किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी। सभी सक्षम अधिकारी, कर्मचारी शिविरों में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे और जनता की समस्याओं को प्राथमिकता से हल करेंगे।

