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देवी-देवताओं का अपमान करने वालों पर पतंजलि कराएगा मुकदमा : स्वामी रामदेव

पौड़ी गढ़वाल:(चीफ एडिटर) यमकेश्वर ब्लॉक के मालागांव में तीन दिवसीय हर्बल कुंभ – जड़ी-बूटी कृषि मेला एवं श्री धन्वंतरि धाम महोत्सव का भव्य समापन हुआ। समापन पर स्वामी रामदेव ने कहा कि भगवान राम, कृष्ण, हनुमान सहित देवी-देवताओं का अपमान करने वालों के खिलाफ अब पतंजलि मुकदमा कराएगा। इसके लिए एक विशेष टीम गठित की जाएगी।स्वामी रामदेव ने कहा कि किसी को भी हमारे आराध्यों का अपमान करने का अधिकार नहीं है। देवी-देवताओं के प्रति अपमानजनक टिप्पणी और जूते मारने जैसी घटनाएं धार्मिक और सांस्कृतिक पाप हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्म, आस्था और महापुरुष का अनादर नहीं होना चाहिए।

उन्होंने कहा कि मोहम्मद साहब या ईसा मसीह के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी हो तो प्रतिक्रिया कैसी होगी, इस पर भी विचार करना चाहिए। उन्होंने सभी धर्मों के प्रति प्रेम और उदारता का संदेश देते हुए कहा कि कोई किसी का मजाक न उड़ाए। शास्त्रों में मिलावट पर कुछ संतों की चुप्पी पर भी उन्होंने सवाल उठाए।स्वामी रामदेव ने श्री धन्वंतरि धाम के विकास में आचार्य बालकृष्ण के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि पिछले पांच वर्षों के अखंड पुरुषार्थ से यह स्थान आचार्य बालकृष्ण की कर्मस्थली और तपस्थली बन गया है।

आचार्य बालकृष्ण ने कहा कि श्री धन्वंतरि धाम प्राचीन भारतीय परंपरा और आधुनिकता का बेजोड़ संगम बनेगा। हर्बल आधुनिक अवधारणा है, जबकि कुंभ सनातन संस्कृति का मूल तत्व है।उन्होंने बताया कि धाम को सिर्फ जड़ी-बूटी और आयुर्वेद का ही नहीं, बल्कि ज्ञान, प्रकृति, संस्कृति, पर्यटन और प्रशिक्षण का भी बड़ा केंद्र बनाया जाएगा। यहां नॉलेज पाथ, इंटरटेनमेंट पार्क, एडवेंचर स्पोर्ट्स, साइकिलिंग ट्रैक और साधना-ध्यान के लिए विशेष गुफाओं का निर्माण किया जा रहा है।4 से 6 नवंबर तक चले इस आयोजन में 2,500 से अधिक लोगों ने भाग लिया, जबकि 500 से अधिक लोग यहां रुककर प्रकृति के बीच बनी इस कार्यस्थली का अनुभव कर रहे थे। समापन पर अगले वर्ष अक्टूबर में हर्बल कुंभ को और बड़े स्वरूप में आयोजित करने की घोषणा की गई।समापन समारोह में विजया इलाहाबादी और उग्रसेन इलाहाबादी को स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने शॉल और रुद्राक्ष माला भेंटकर सम्मानित किया। बड़ी संख्या में संत और साध्वी भी मौजूद रहे। तीसरे दिन की शुरुआत स्वामी रामदेव और आचार्य बालकृष्ण ने मालागांव में योग से की थी।

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