हरिद्वार:(जीशान मलिक)दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा से जुड़े एक गंभीर मामले में न्यायालय ने थाना पथरी पुलिस को एफआईआर दर्ज कर विवेचना करने के आदेश दिए हैं। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट/प्रथम अपर सिविल जज (सीनियर डिवीजन), हरिद्वार ने धारा 175(3) भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता के अंतर्गत यह आदेश पारित किया।
थाना पथरी क्षेत्र की रहने वाली पीड़िता शहजून ने अपने पति तनवीर सहित ससुराल पक्ष के कई सदस्यों पर दहेज की अवैध मांग, मारपीट, गाली-गलौज और जान से मारने की धमकी देने के आरोप लगाए हैं। आपको बता दे कि पीड़िता के अनुसार विवाह के बाद से ही उस पर लगातार कम दहेज लाने का दबाव बनाया गया। और 10 लाख रुपये नकद की मांग की गई। मांग पूरी न होने पर उसे कई बार प्रताड़ित किया गया और घर से निकाल दिया गया।
पीड़िता की ओर से अधिवक्ता अमित भारद्वाज ने न्यायालय में पक्ष रखते हुए बताया कि पीड़िता द्वारा बार-बार थाना और उच्च अधिकारियों को शिकायत देने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई।जिसके चलते उसे न्यायालय की शरण लेनी पड़ी। न्यायालय ने मेडिकल रिपोर्ट, शिकायत पत्रों एवं अन्य अभिलेखों का अवलोकन कर प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध पाया।
अदालत ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार के निर्णय का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि संज्ञेय अपराध की सूचना मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। इसके तहत थाना पथरी पुलिस को निर्देशित किया गया है कि वह संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष विवेचना सुनिश्चित करे।
न्यायालय के आदेश के बाद अब पुलिस कार्रवाई शुरू होने की संभावना है, जिससे पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

