
हरिद्वार:(जीशान मलिक) राज्य पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन निदेशालय तथा GIZ इंडिया के संयुक्त तत्वावधान में आज ग्रामीण आजीविका को सुदृढ़ करने और जलवायु-अनुकूल आजीविका मॉडल के विस्तार को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन होटल फेयरफील्ड, देहरादून में किया गया।इस आयोजित कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में उत्तराखंड शासन के वन एवं पर्यावरण विभाग के सचिव सी. रविशंकर तथा विशिष्ट अतिथि के रूप में भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की उप सचिव डॉ. रुचिका दराल उपस्थित रहीं। इस दौरान निदेशक पर्यावरण एस.पी. सुबुद्धि भी मौजूद रहे।
कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका संवर्धन के साथ-साथ जलवायु-अनुकूल मॉडल विकसित करना और उनका व्यापक स्तर पर विस्तार करना था। इस दौरान जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण समुदायों की आजीविका को अधिक टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल बनाने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।कार्यशाला का शुभारंभ निदेशक पर्यावरण एस.पी. सुबुद्धि ने किया। तकनीकी सत्र में संयुक्त निदेशक वैभव कुमार सिंह ने वनाग्नि की रोकथाम के लिए कार्बन फाइनेंस की भूमिका और संभावनाओं पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कार्बन फाइनेंस के माध्यम से वन संरक्षण, वनाग्नि रोकथाम और जलवायु परिवर्तन के दुष्प्रभावों को कम करने के प्रयासों को वित्तीय सहयोग मिल सकता है।
“कार्यशाला में चार प्रमुख विषयों पर चर्चा हुई…
1. जलवायु-अनुकूल आजीविका मॉडल का विस्तार
2. ग्रामीण आजीविका का संवर्धन – कृषि, बागवानी, पशुपालन, बीज उत्पादन को जलवायु अनुकूल बनाना
3. वनाग्नि की रोकथाम एवं कार्बन फाइनेंस
4. परियोजना की कार्ययोजना एवं क्रियान्वयन
अंत में जलवायु-अनुकूल मॉडल को प्रोत्साहित करने, ग्रामीण समुदायों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने और पर्यावरण संरक्षण के उद्देश्यों को आगे बढ़ाने के सामूहिक संकल्प के साथ कार्यशाला का समापन हुआ।

