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गढ़वाली–कुमाऊनी भाषा के प्रश्नों को लेकर ग्राम प्रधान ने उठाई आवाज़, मैदानी युवाओं के लिए समान अवसर की मांग

हरिद्वार:(चीफ एडिटर)अजीतपुर ग्राम पंचायत (ब्लॉक बहादराबाद) के ग्राम प्रधान प्रखर कश्यप ने उत्तराखंड लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षाओं में गढ़वाली और कुमाऊनी भाषा से जुड़े प्रश्नों को लेकर गंभीर आपत्ति दर्ज की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मैदानी क्षेत्र के युवाओं की कठिनाइयों पर ध्यान आकर्षित किया।

ग्राम प्रधान ने कहा कि हरिद्वार और उधमसिंहनगर जैसे मैदानी जिलों के अभ्यर्थियों का इन भाषाओं से कोई व्यावहारिक या शैक्षणिक संपर्क नहीं रहा है। ऐसे में 8 से 12 अंकों के प्रश्न अंतिम चयन सूची में बड़ा अंतर पैदा कर रहे हैं और मेधावी छात्र-छात्राओं को नुकसान झेलना पड़ रहा है।

प्रखर कश्यप ने सुझाव दिया कि गढ़वाली और कुमाऊनी भाषा से संबंधित प्रश्नों को केवल क्वालीफाइंग प्रकृति का बनाया जाए, यानी न्यूनतम अंक प्राप्त करना अनिवार्य हो लेकिन उन्हें फाइनल मेरिट में न जोड़ा जाए। साथ ही भविष्य में यदि इन विषयों को अनिवार्य करना आवश्यक हो, तो मैदानी क्षेत्रों के लिए मानक अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाए और तैयारी हेतु पर्याप्त समय दिया जाए।

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