मुरादाबाद:(जीशान मलिक) कुंदरकी संभल कुंदरकी नगर के मोहल्ला नूरउल्लाह स्थित सिद्दीक-ए-अकबर मस्जिद में गुलामाने सिद्दीक-ए-अकबर के तत्वावधान में सालाना दस रोज़ा पैग़ाम-ए-कर्बला कान्फ्रेंस का आगाज़ हो गया। कान्फ्रेंस का मकसद तौहीद-ए-बारी तआला, इस्लामी तालीमात और कर्बला के पैग़ाम को आम लोगों तक पहुंचाना है। पहले दिन उलमा-ए-अहले सुन्नत ने तौहीद, इबादत और आखिरत पर रौशनी डाली।कान्फ्रेंस का आगाज़ कुरआन पाक की तिलावत से हाफिज़ मुहम्मद तहज़ीब रज़ा ने किया। इसके बाद बारगाह-ए-रिसालत में नबी-ए-करीम सल्लाहु अलैहि वसल्लम की शान में कलाम पेश किया गया। माहौल पुरनूर हो गया और बड़ी संख्या में अकीदतमंद शरीक हुए।
पहली शब को खिताब करते हुए मुफ्ती मुज़फ्फर हुसैन मिस्बाही ने कहा कि अल्लाह एक है और उसका कोई शरीक नहीं। उन्होंने कहा कि अल्लाह पाक की इबादत करो, अपने समय को नेकियों में गुज़ारो। एक दिन मरना है, आखिर मौत है, कर ले जो करना है, आखिर मौत है। मुफ्ती साहब ने अपने पुरतासीर अंदाज़ में कहा कि “कोई तो है जो निज़ाम-ए-दुनिया चला रहा है, वही खुदा है”। उन्होंने मुसलमानों को गुनाहों से बचने और हक-हलाल की ज़िंदगी अपनाने की नसीहत दी।
तकरीर के आखिर में बारगाह-ए-रिसालत में सलातो सलाम पेश किया गया और देशभर में अमन-चैन, भाईचारा और तरक्की कायम रहने की दुआ कराई गई। मजलिस में शरीक लोगों ने दुआ पर ‘आमीन’ कहा।
इस मौके पर मौलाना ग़य्यूर अहमद आफाकी, सूफी अनीसुर रहमान अज़हरी, मुफ्ती सुब्हान रज़ा, मुफ्ती मुहम्मद बिलाल रज़ा, कारी मेहंदी हसन, गुलाम नबी अत्तारी, इंतज़ार रज़वी, इरफान खान, हाफिज़ फ़राज़, हाफिज़ फैज़ान सहित बड़ी ताद में उलमा, ज़िम्मेदारान और आम लोग मौजूद रहे। दस रोज़ा कान्फ्रेंस में रोज़ाना अलग-अलग उलमा हज़रात कर्बला के पैग़ाम और इस्लामी तालीमात पर बयान करेंगे।

