पड़ोसी पर भरोसा महंगा पड़ा
मुरादाबाद,आलम अंसारी,भगवा सनातन टाइम्स
17 जुलाई 2025 एक साधारण दिन… एक सीधी-सादी महिला… और एक ऐसा पड़ोसी जिसे वह वर्षों से जानती थी।
लेकिन किसी को क्या पता था कि यह भरोसा धीरे-धीरे एक ऐसे जाल में बदल जाएगा, जिसकी कीमत उन्हें ₹95,000 में चुकानी पड़ेगी।
यह कहानी है मैनाठेर पुलिया, नई आबादी निवासी महजबीन की। उनके पति रोज मेहनत-मजदूरी कर बच्चों को पालते हैं, और जीवन बड़ी सादगी से चल रहा था — जब तक कि पड़ोसन सबा ने एक दिन दरवाज़े पर दस्तक नहीं दी।
सबा ने दो लोगों से मिलवाया — आसिफ सैफी और साहिल। कहा, “बेचारे बहुत परेशान हैं… कुछ मदद कर दो।”
महजबीन ने जवाब दिया — “मेरे पास खुद कुछ नहीं है।”
लेकिन सामने वाले पहले से तैयारी में थे। बोले, “हमें बस आपके डॉक्यूमेंट्स की जरूरत है। लोन हम खुद लेंगे, आपको कुछ नहीं करना।”
महजबीन को शक नहीं हुआ। उन्होंने अपनी बैंक पासबुक, आधार कार्ड और पहचान पत्र दे दिए — भरोसे में। कुछ दिनों बाद, आसिफ ने उन्हें बैंक ले जाकर कुछ कागज़ों पर हस्ताक्षर करवा दिए और कहा — “लोन मंजूर नहीं हुआ।”
सारा मामला यहीं खत्म हो जाना चाहिए था… लेकिन असली कहानी तो अब शुरू हुई।
12 जुलाई को अचानक एक कॉल आता है।
बैंक से फोन: “अगर EMI जमा नहीं की गई, तो नोटिस भेजा जाएगा।”
महजबीन के पति सन्न रह गए। बैंक गए, जानकारी निकाली — और उनके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।
पता चला कि दो लोन निकल चुके हैं:
🔹 सेटिन से ₹45,000
🔹 जन स्मॉल बैंक से ₹50,000
और ये सब — महजबीन के नाम पर!
अब महजबीन ने आरोप लगाया है कि सबा, आसिफ और साहिल ने मिलकर उनके दस्तावेज़ों का दुरुपयोग किया और उन्हें धोखे में रखकर लोन लिया। मामला गंभीर है, और पीड़िता ने प्रशासन से उचित कार्रवाई की मांग की है।
इस घटना ने एक बार फिर सावधानी की ज़रूरत को उजागर किया है —
👤 कभी किसी पर आंख मूंदकर भरोसा न करें
📄 अपने दस्तावेज़ दूसरों को देने से पहले सोचें दस बार
🖊️ बिना पढ़े किसी भी कागज पर हस्ताक्षर न करें
कहानी महजबीन की है — लेकिन सबक हम सबका है।

