Breaking
26 Apr 2026, Sun

अल्मोड़ा में ई.एन.टी. सेवाएं ठप होने की कगार पर: स्वास्थ्य विभाग की दोहरी नीति से जनता त्रस्त

अल्मोड़ा में ई.एन.टी. सेवाएं ठप होने की कगार पर: स्वास्थ्य विभाग की दोहरी नीति से जनता त्रस्त

अल्मोड़ा, 20 अप्रैल :भगवा सनातन टाइम्स

अल्मोड़ा जिला अस्पताल में नाक, कान और गले (ई.एन.टी.) विभाग की सेवाएं एक बार फिर संकट के दौर में पहुंच गई हैं। विभाग की एकमात्र विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. सोनाली जोशी का हाल ही में पौड़ी स्थानांतरण कर दिया गया है, जिससे पूरे जिले में ई.एन.टी. सेवाओं के अस्तित्व पर प्रश्नचिह्न लग गया है। इस निर्णय से न केवल स्वास्थ्य सुविधाओं की निरंतरता बाधित हुई है, बल्कि इसे पर्वतीय क्षेत्र की जनता के अधिकारों के भी विरुद्ध माना जा रहा है।

सेवाएं फिर से बंद होने की आशंका

डॉ. सोनाली जोशी ने अल्मोड़ा में अपनी सेवा अवधि के दौरान कुशलता, समर्पण और सहज व्यवहार से स्थानीय जनता का विश्वास अर्जित किया था। उल्लेखनीय है कि 31 अक्टूबर 2023 के बाद जिले में ई.एन.टी. सर्जरी पूरी तरह बंद हो चुकी थी, और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में की गई शिकायतों तथा साक्ष्यों के आधार पर ही सेवाएं दोबारा शुरू हो सकी थीं। अब जब यह विभाग पुनः पटरी पर लौट रहा था, तब डॉ. जोशी का स्थानांतरण कर दिया गया, जिससे एक बार फिर इस सेवा के ठप होने की स्थिति बन गई है।

“क्या यह जनहित है?” – सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे

इस निर्णय पर सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा, “यह स्थानांतरण जनविरोधी और असंवेदनशील है। एक ओर सरकार स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने की बात करती है, दूसरी ओर ईमानदारी से काम कर रही चिकित्सकों को हटाया जा रहा है। यह अल्मोड़ा की जनता के साथ अन्याय है।”

स्वास्थ्य विभाग की दोहरी नीति पर सवाल

स्वास्थ्य विभाग की नीति पर सवाल तब और गहराए जब यह तथ्य सामने आया कि थलीसैंण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में कार्यरत ई.एन.टी. विशेषज्ञ डॉ. अश्वनी चौहान, पिछले दो वर्षों से जनरल सर्जन के पद पर कार्यरत हैं — जबकि वहां ई.एन.टी. का पद स्वीकृत ही नहीं है। डॉ. चौहान कई बार पौड़ी स्थानांतरण की मांग कर चुके हैं, जो उनकी विशेषज्ञता का क्षेत्र है, लेकिन उनकी अपील पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। इसके विपरीत, अल्मोड़ा में कार्यरत और जनहित में सेवा दे रही डॉ. सोनाली को अचानक स्थानांतरित कर दिया गया।

स्थानांतरण आदेश की जानकारी तक नहीं थी अधिकारियों को

संजय पाण्डे द्वारा मुख्य चिकित्सा अधिकारी से की गई मुलाक़ात में यह तथ्य भी सामने आया कि उन्हें डॉ. जोशी के स्थानांतरण आदेश की कोई जानकारी नहीं थी। यह स्पष्ट करता है कि यह निर्णय बिना समुचित समन्वय और जमीनी परिस्थिति की जानकारी के लिया गया है।

जनता की प्रमुख मांगें

•डॉ. सोनाली जोशी के स्थानांतरण आदेश को तत्काल निरस्त किया जाए।

•उन्हें अल्मोड़ा में स्थायी रूप से नियुक्त किया जाए।

•डॉ. अश्वनी चौहान को उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप पौड़ी स्थानांतरित किया जाए।

“कब तक मिलेगा अधिकार?”

यह घटनाक्रम एक बार फिर उस प्रश्न को जन्म देता है जिसे हर पर्वतीय नागरिक पूछ रहा है — “क्या हमारे स्वास्थ्य अधिकारों का कोई मूल्य नहीं है? कब तक हमें अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करना पड़ेगा?”

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *