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Hec college, हरिद्वार में दिखी विज्ञान की अनोखी दुनिया – छात्रों के मॉडल ने चौंकाया!

Hec college, हरिद्वार में दिखी विज्ञान की अनोखी दुनिया – छात्रों के मॉडल ने चौंकाया!

(मनन ढींगरा)हरिद्वार के एचईसी कॉलेज ऑफ इंस्टीट्यूशन्स में राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर ऐसा नज़ारा देखने को मिला, जिसने सभी को हैरान कर दिया। जैसे ही विज्ञान प्रदर्शनी शुरू हुई, दर्शकों की नज़रें एक के बाद एक मॉडल पर टिकती चली गईं। आखिर ऐसा क्या खास था इस प्रदर्शनी में? कौन-से मॉडल सबसे ज्यादा चर्चा में रहे? आइए जानते हैं इस रोचक आयोजन की पूरी कहानी!

दीप प्रज्ज्वलन से हुई शुरुआत, फिर खुला विज्ञान का संसार

कार्यक्रम का शुभारंभ डीन एकेडेमिक डॉ. तृप्ति अग्रवाल और विभागाध्यक्ष डॉ. कमलकांत ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस दौरान डॉ. तृप्ति अग्रवाल ने बताया कि यह दिवस भौतिक वैज्ञानिक डॉ. सी.वी. रमन के सम्मान में मनाया जाता है, जिन्होंने रमन प्रभाव की खोज कर विज्ञान जगत को नई दिशा दी थी। लेकिन असली रोमांच तो तब शुरू हुआ, जब छात्रों ने अपने अद्भुत विज्ञान मॉडल प्रदर्शित किए!

जब छात्रों ने दिखाए अपने अविष्कार, तो दंग रह गए सभी

बीएससी, एमएससी, बीएससी (बायोटेक्नोलॉजी), बीएससी (माइक्रोबायोलॉजी) और बीएससी ऑनर्स (एग्रीकल्चर) के छात्रों ने अपने इनोवेटिव मॉडल्स से सभी को चौंका दिया। सबसे ज्यादा ध्यान खींचने वाले मॉडल थे:

•स्मार्ट एग्रीकल्चर फार्मिंग – क्या खेती का भविष्य बदल सकता है यह मॉडल?

•अर्थक्वेक अलार्म – क्या यह डिवाइस भूकंप आने से पहले ही कर देगी आगाह?

•फायर सेफ्टी डिवाइस – आग से बचाव के लिए कितनी कारगर होगी यह तकनीक?

•बैक्टीरिया फॉज – क्या यह खोज माइक्रोबायोलॉजी की दुनिया में मचा सकती है हलचल?

•डायलिसिस यूनिट – क्या यह तकनीक मेडिकल साइंस में ला सकती है क्रांतिकारी बदलाव?

•प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम – क्या प्लास्टिक प्रदूषण से निजात दिला सकता है यह मॉडल?

इनके अलावा, स्मार्ट सिटी, एसिड रेन, फ्लड अलार्म जैसे कई मॉडल भी आकर्षण का केंद्र बने। छात्रों ने पोस्टर मेकिंग के जरिए ईईजी मॉडल, थ्योरी ऑफ स्पॉन्टेनियस और क्रोमैटोग्राफी जैसे जटिल वैज्ञानिक सिद्धांतों को भी सरल तरीके से प्रस्तुत किया।

शिक्षकों का मार्गदर्शन, छात्रों की मेहनत का दिखा असर

इस प्रदर्शनी को सफल बनाने में डॉ. निधी जोशी, दीपांशी वाजपेयी, अशोक कुमार, नीलम वर्मा, विशाखा, डॉ. तनु चंद्रा, डॉ. निघी वर्मा और कुमारप्रीत जैसे शिक्षकों ने अहम भूमिका निभाई।

तो क्या इन मॉडलों से बदलेगा भविष्य?

छात्रों के इन प्रयोगों ने यह साबित कर दिया कि विज्ञान केवल किताबों तक सीमित नहीं, बल्कि इसका असली उद्देश्य नवाचार और जीवन को आसान बनाना है। अब सवाल यह उठता है – क्या इनमें से कुछ मॉडल भविष्य में बड़े इनोवेशन का आधार बन सकते हैं? क्या ये खोजें समाज को नई दिशा देंगी? जवाब तो आने वाला समय ही देगा, लेकिन एक बात तय है – इस प्रदर्शनी ने सभी को विज्ञान के प्रति और अधिक जिज्ञासु बना दिया!

 

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