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Hariyali Teej रोटरी क्लब ने महिलाओं को जोड़ा, परंपराओं को संवारा, हरियाली का संदेश फैलाया

Hariyali Teej रोटरी क्लब ने महिलाओं को जोड़ा, परंपराओं को संवारा, हरियाली का संदेश फैलाया

हरिद्वार,भगवा सनातन टाइम्स

शहर की भागदौड़, मॉडर्न जीवनशैली और तेजी से बदलती प्राथमिकताओं के बीच जब परंपराएं दम तोड़ने लगती हैं, तब कुछ लोग आगे बढ़कर उन्हें फिर से सांस देना जानते हैं। ऐसी ही एक कोशिश देखने को मिली 26 जुलाई 2025 को, जब रोटरी क्लब कनखल ने हरिद्वार के ली-ग्रैंड होटल में सावन के दो पावन त्योहारों  हरियाली तीज और उत्तराखंड का लोकपर्व हरेला — को अद्भुत अंदाज़ में मनाया।

 

यह सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि एक सांस्कृतिक संकल्प था — प्रकृति, नारी और परंपरा को फिर से जोड़ने का।

पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने जब लोकगीतों की धुन पर कदमताल की, तो ऐसा लगा मानो सावन फिर से अपनी रंगत में लौट आया हो। हाथों में रची मेहंदी, सोलह श्रृंगार, और उल्लास से भरे चेहरे — यह नज़ारा बीते ज़माने की झलक भी था और भविष्य की उम्मीद भी।

 

हरेला पर्व पर दिया गया हर सदस्य को एक पौधा, इस विचार के साथ कि हम सिर्फ पर्व न मनाएं, बल्कि उसे जीएं भी। क्लब की अध्यक्ष सिमरन कौर ने जहां तीज को “नारी और प्रकृति के उत्सव” की संज्ञा दी, वहीं सचिव ममता अरोड़ा ने हरेला को “पर्यावरणीय चेतना का प्रतीक” बताया।

 

कार्यक्रम में गीत, नृत्य और स्वादिष्ट पारंपरिक व्यंजनों ने मिलकर एक ऐसा वातावरण रचा, जो सिर्फ स्मृति नहीं बना, बल्कि एक प्रेरणा बन गया।

उपस्थित रहीं मुख्य सदस्याएं:सिमरन कौर, राधिका अग्रवाल, पूजा चावला, विनिशा गर्ग, सरिता अग्रवाल, अर्चना त्यागी, ज्योति शर्मा, ऋचा चावला, अंकिता शर्मा, हर्षिता गर्ग, गीतिका अग्रवाल, भाविका अरोड़ा, श्रुति जैन, कंचन जोशी, अनुपमा सुबद्धि, सोमैया गर्ग और खुशबू गुप्ता।

जब परंपरा प्रकृति से मिलती है, तब समाज में नये जीवन का संचार होता है।

रोटरी क्लब कनखल का यह आयोजन सिर्फ एक तीज-महोत्सव नहीं था, यह एक संदेश था —

“संस्कृति सिर्फ किताबों में नहीं, हमारे कर्मों में जीवित रहनी चाहिए।”

 

 

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