रुड़की:(जीशान मलिक) हरिद्वार के रुड़की में शनिवार की रात को मशाल जुलूस निकाला गया।अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की धीमी गति और वीआईपी के नाम पर रहस्य को लेकर देवभूमि के लोगों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। अशोक नगर क्षेत्रीय विकास समिति और चिह्नित आंदोलनकारी संघर्ष समिति के नेतृत्व में रुड़की में एक विशाल ‘आक्रोश मशाल रैली’ का आयोजन किया गया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के सिटिंग जज की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की।
उत्तराखंड राज्य आंदोलनकारी समिती युवा मंच उत्तराखंड एकता मंच एवं गढ़वाल सभा के बैनर तले आयोजित मशाल जुलूस के दौरान प्रदर्शनकारियों ने एक सुर में सरकार से मांग की कि सरकार ने मामले में सीबीआई जांच की संस्तुति तो दे दी है लेकिन यह जांच हाईकोर्ट के किसी सिटिंग जज (वर्तमान न्यायाधीश) की सीधी निगरानी में होनी चाहिए।
ताकि साक्ष्यों के साथ कोई छेड़छाड़ न हो सके और असली दोषियों को सजा मिल सके। इस दौरान हाथों में मशालें थामे सैकड़ों महिलाओं (मातृशक्ति) का हुजूम शिवाजी चौक अशोक नगर से शुरू होकर शिवाजी कॉलोनी के विभिन्न मार्गों से गुजरा। महिलाओं ने कहा कि जब तक वीआईपी का नाम उजागर नहीं होता, उनका संघर्ष जारी रहेगा। रैली के अंत में पदाधिकारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सरकार सिटिंग जज की निगरानी में जांच की मांग को अनसुना करती है। तो रुड़की से शुरू हुआ यह आक्रोश पूरे प्रदेश में दावानल की तरह फैलेगा। उन्होंने कहा कि अंकिता को न्याय दिलाना अब केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे उत्तराखंड के स्वाभिमान की लड़ाई है।
इस कार्यक्रम में हर्ष प्रकाश काला, कमला बमौला, राजेंद्र रावत, पूर्ण सिंह बिष्ट, राकेश चौहान, एसएस बिष्ट, हेमंत बढ़थवाल, प्रवेश कुमार जोशी, अनिल उप्रेती, प्रेम सिंह चौहान आदि शामिल रहे।

