अल्मोड़ा:(ज़ीशान मलिक)पहाड़ कि सरजमी पर जनता को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने के उद्देश्य से स्थापित अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज अब अपने मूल उद्देश्य से भटक चुका है. यहाँ पर इलाज का केंद्र बनने के बजाय एक रेफरल सेंटर बन गया है. संसाधनों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी के कारण गंभीर मरीजों को बिना उपचार के हल्द्वानी भेजा जा रहा है.
गर्भवती महिलाओं के लिए अस्पताल नहीं, सिर्फ “रेफर” सेंटर है
इन दिनों जिला महिला चिकित्सालय में पुनर्निर्माण कार्य चल रहा है, जिससे सिजेरियन ऑपरेशन पूरी तरह बंद हैं. ऐसे में गर्भवती महिलाओं को मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है, लेकिन वहां भी सुविधाओं की कमी और डॉक्टरों के अभाव के कारण उन्हें हल्द्वानी रेफर कर दिया जाता है.
सबसे बड़ा सवाल – जिन गर्भवती महिलाओं को अल्मोड़ा में “गंभीर” बताकर हल्द्वानी रेफर किया जाता है, वहीं हल्द्वानी में उनका सामान्य प्रसव आसानी से हो जाता है.
कभी N.I.C.U. (नेओनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट) फुल होने का बहाना बनाया जाता है.
कभी P.I.C.U. (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में जगह न होने की बात कहकर मरीजों को हल्द्वानी भेज दिया जाता है.यह लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की नाकामी और पहाड़ के लोगों के साथ धोखा है.
मेडिकल कॉलेज: सिर्फ इमारतें बनाना ही समाधान नहीं गरीबो का इलाज भी होना सुनिचित हो
उत्तराखंड सरकार हर साल नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणाएं कर रही है. लेकिन पहले से बने कॉलेजों की हालत बद से बदतर होती जा रही है.जिनमे डॉक्टरो कि कमी है.अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज में न्यूरोसर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, रेडियोलॉजिस्ट सहित कई विशेषज्ञ डॉक्टरों की भारी कमी है. जरूरी उपकरणों की अनुपलब्धता के कारण मरीजों को हल्द्वानी रेफर किया जा रहा है.जनप्रतिनिधि सिर्फ ज्ञापन देने तक सीमित हैं, लेकिन किसी ने इस मुद्दे को सदन में नहीं उठाया.
सबसे बड़ा सवाल – जब विशेषज्ञ डॉक्टर ही नहीं हैं, तो सरकार नए मेडिकल कॉलेजों की घोषणाएं क्यों कर रही है?
क्या सरकार सिर्फ इमारत खड़ी करने को ही स्वास्थ्य सुविधा मान रही है बड़ा सवाल?
सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे के प्रयासों से तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति
हालांकि, सामाजिक कार्यकर्ता संजय पाण्डे के निरंतर प्रयासों से गायनी (स्त्री रोग), सर्जरी और फार्मा विभाग में तीन विशेषज्ञ डॉक्टरों की तैनाती हो चुकी है. यह एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है, लेकिन समस्या का संपूर्ण समाधान नहीं.
जनता की मांग – अब वादे नहीं, ठोस कदम उठाने होंगे सरकार क़ो!
मेडिकल कॉलेज में तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति हो.
गर्भवती महिलाओं के लिए सिजेरियन ऑपरेशन की सुविधा बहाल की जाए. रेडियोलॉजिस्ट, कार्डियोलॉजिस्ट और न्यूरोसर्जन की तैनाती अनिवार्य की जाए. जनप्रतिनिधि सिर्फ ज्ञापन न दें, बल्कि इस मुद्दे को सदन में मजबूती से उठाएं. मेडिकल कॉलेज को पूरी तरह सक्षम बनाने के लिए संसाधनों की तुरंत व्यवस्था की जाए.
मामला मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में दर्ज, उच्चाधिकारियों से सीधा संपर्क जारी
इस गंभीर समस्या को लेकर मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज करवाई गई है.
स्वास्थ्य सचिव और मुख्यमंत्री के मुख्य सचिव को ईमेल के माध्यम से पूरी स्थिति से अवगत कराया गया है. उच्चाधिकारियों से फोन पर लगातार संपर्क कर समाधान की मांग की जा रही है.
अगर जल्द ही कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, तो अल्मोड़ा मेडिकल कॉलेज सिर्फ एक दिखावटी इमारत बनकर रह जाएगा, जिससे पहाड़ के लोगों की उम्मीदें हमेशा के लिए टूट जाएंगी. अब समय आ गया है कि सरकार और जनप्रतिनिधि नींद से जागें और जनता को उनका हक दिलाएं।

