Site icon Bhagwa Sanatan Times

हरिद्वार में कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न पर विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन

हरिद्वार:(चीफ एडिटर)जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार के सभागार भवन में कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम, 2013 (POSH Act) पर एक विशेष विधिक जागरूकता कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना और उनके मौलिक अधिकारों की रक्षा करना था।

इस कार्यशाला में मुख्य अतिथि नीलम रात्रा, प्रथम अपर जिला जज हरिद्वार/अध्यक्ष, आंतरिक शिकायत समिति (ICC) POSH Act जिला न्यायालय हरिद्वार रहीं। मुख्य वक्ता सिमरनजीत कौर, सिविल जज (सी०डी०)/सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण हरिद्वार द्वारा एक विस्तृत पीपीटी (PPT) प्रस्तुतीकरण के माध्यम से उपस्थित प्रतिभागियों को (POSH Act) कार्यस्थल पर महिलाओं का यौन उत्पीड़न (रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम, 2013 कानून की बारीकियों से अवगत कराया।

उन्होंने बताया कि इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य कार्यस्थल पर महिलाओं को सुरक्षा प्रदान करना और उनके मौलिक अधिकारों (समानता, गरिमा और व्यवसाय की स्वतंत्रता) की रक्षा करना है। चर्चा के दौरान ऐतिहासिक ‘विशाखा बनाम राजस्थान राज्य’ मामले का उल्लेख किया गया, जिससे इस कानून को लाने के लिए नींव पड़ी।

सचिव ने स्पष्ट किया कि जिस भी संस्थान में 10 से अधिक कर्मचारी व महिला कर्मचारी हैं, वहाँ ‘आंतरिक शिकायत समिति’ (ICC) का गठन अनिवार्य है। उन्होंने बताया कि पीड़ित महिला घटना के 3 महीने के भीतर लिखित शिकायत दर्ज करा सकती है। समिति को 90 दिनों के अन्दर जांच पूरी करनी होती है।

नियोक्ता की जिम्मेदारी है कि वह कार्यस्थल पर सुरक्षित वातावरण प्रदान करे और नियमित जागरूकता कार्यशालाएं आयोजित करे। नियमों का उल्लंघन करने पर 50,000 रुपये तक के जुर्माने और लाइसेंस रद्द होने तक का प्रावधान है।

कार्यक्रम के अंत में सचिव सिमरनजीत कौर ने इस बात पर जोर दिया कि यौन उत्पीड़न केवल शारीरिक संपर्क तक सीमित नहीं है, बल्कि यौन अर्थ वाली टिप्पणियां, अश्लील चित्र दिखाना या किसी भी प्रकार का अवांछित व्यवहार भी इसी श्रेणी में आता है। उन्होंने महिलाओं से अपने अधिकारों के प्रति सजग रहने का आह्वान किया।

इस कार्यशाला के अंत में नीलम रात्रा, प्रथम अपर जिला जज/अध्यक्ष, आंतरिक शिकायत समिति (ICC) POSH Act द्वारा कार्यशाला में उपस्थित सभी विभागों व एन०जी०ओ० से प्रतिभाग करने वाली लगभग 45 महिलाओं को प्रशस्ति पत्र प्रदान किये गये।

Exit mobile version