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सरकार की उपेक्षा से भड़के आयुर्वेदिक डॉक्टर: अल्मोड़ा में काला फीता बांधकर किया प्रदर्शन, ओपीडी जारी

अल्मोड़ा:(जीशान मलिक) आयुष विभाग के प्रति राज्य सरकार के उपेक्षापूर्ण रवैये से नाराज प्रदेश भर के आयुर्वेदिक चिकित्सकों का गुस्सा अब सड़कों पर दिखने लगा है। आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा सेवा संघ (उत्तराखंड) के आह्वान पर चरणबद्ध आंदोलन की शुरुआत करते हुए सोमवार को जनपद अल्मोड़ा के आयुर्वेदिक चिकित्साधिकारियों ने ओपीडी सेवाओं के दौरान काला फीता बांधकर सांकेतिक विरोध प्रदर्शन किया।जिला इकाई अल्मोड़ा के अध्यक्ष डॉ. कपिल शर्मा एवं सचिव डॉ. अनुपमा त्यागी के नेतृत्व में हुए इस विरोध में चिकित्सकों ने सरकार पर आयुर्वेदिक चिकित्सा सेवा की लगातार उपेक्षा का आरोप लगाया। चिकित्सकों का कहना है कि उत्तराखंड जैसे विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्य में भी चिकित्सकों को आधार आधारित एवं मोबाइल एप के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने के लिए बाध्य किया जा रहा है।

“पहाड़ों में नेटवर्क की समस्या आम है। कई डिस्पेंसरी दूरस्थ क्षेत्रों में हैं जहां सिग्नल ही नहीं आता। ऐसे में एप से हाजिरी लगाना अव्यावहारिक है और इससे मरीजों की सेवा प्रभावित हो रही है,” डॉ. कपिल शर्मा ने कहा।संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि चिकित्सकों की लंबे समय से लंबित एवं बहुप्रतीक्षित मांगों पर सरकार ने आज तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इन मांगों में एसीपी (Assured Career Progression), डीएसपी (Dynamic Assured Career Progression), संवर्ग निदेशक की नियुक्ति, सेवा ढांचे का पुनर्गठन तथा वर्ष 2024 बैच के चिकित्साधिकारियों का स्थायीकरण प्रमुख हैं।

डॉ. अनुपमा त्यागी ने कहा, “एलोपैथी के चिकित्सकों की तरह हमें भी पदोन्नति और सेवा लाभ मिलने चाहिए। आयुर्वेद को सिर्फ भाषणों में बढ़ावा दिया जाता है, जमीन पर सुविधाएं शून्य हैं। दवाओं की कमी, स्टाफ की कमी और अब इस तरह के तुगलकी फरमान से चिकित्सक हताश हैं।”विरोध कर रहे चिकित्सकों ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो आंदोलन के दूसरे चरण में इसे और अधिक व्यापक एवं प्रभावी रूप दिया जाएगा। संघ ने कहा कि आगे की स्थिति की पूरी जिम्मेदारी शासन एवं प्रशासन की होगी।बता दें कि सांकेतिक विरोध के दौरान चिकित्सकों ने ओपीडी सेवाएं जारी रखीं, ताकि मरीजों को परेशानी न हो। लेकिन काला फीता बांधकर उन्होंने अपना विरोध दर्ज कराया।

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