लखीमपुर खीरी-बहराइच रेलखंड बंद करने के आदेश से जनता में भारी आक्रोश, यूपी चुनावों पर पड़ सकता है असर
ब्रिटिश काल की ऐतिहासिक मीटर गेज लाइन को हमेशा के लिए बंद करने की तैयारी, लोगों ने सरकार और विभागों पर लगाए गंभीर आरोप
लखीमपुर खीरी,सरोज राज, भगवा सनातन टाइम्स
लखीमपुर खीरी के मैलानी से चलकर बेलरायां, तिकुनिया, नानपारा होते हुए बहराइच तक जाने वाली ऐतिहासिक मीटर गेज रेलवे लाइन को स्थायी रूप से बंद करने के आदेश ने जनता को झकझोर कर रख दिया है। सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया पर खबर फैलते ही आमजन में भारी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों का कहना है कि डबल इंजन सरकार न केवल जनता की जरूरतों की अनदेखी कर रही है, बल्कि ऐतिहासिक धरोहरों को भी खत्म करने पर आमादा है।
जनता का फूटा गुस्सा, सरकार से उठ गया भरोसा
लोगों का आरोप है कि जिस रेल लाइन ने दशकों से सीमावर्ती क्षेत्रों के लाखों यात्रियों, मजदूरों, पर्यटकों और नेपाल से आने-जाने वालों की जीवन रेखा का काम किया, उसे बंद कर देना सरकारी विफलता का प्रतीक है। खासतौर से तब जब देश चंद्रमा पर झंडा फहरा रहा है और सबसे ऊंचे रेल पुलों का उद्घाटन हो रहा है, ऐसे में लखीमपुर-बहराइच जैसे महत्वपूर्ण सीमावर्ती इलाकों को रेलवे से वंचित रखना समझ से परे है।
फर्जी आदेश और अधूरी बहाली ने बढ़ाई बेचैनी
गौरतलब है कि 15 फरवरी 2020 को मैलानी-बहराइच रेलखंड को वन विभाग के एक कथित फर्जी आदेश के आधार पर बंद कर दिया गया था। इसके विरोध में सामाजिक संस्थाओं द्वारा माननीय उच्च न्यायालय, लखनऊ में जनहित याचिका दायर की गई, जिसके बाद रेल सेवा आंशिक रूप से बहाल तो हुई, लेकिन वह पूर्ववत संचालन तक नहीं पहुंच सकी।
बस माफिया को फायदा पहुंचाने का आरोप
स्थानीय लोगों का यह भी आरोप है कि रेलवे विभाग की निष्क्रियता और लापरवाही से सीमावर्ती क्षेत्रों में डग्गामार बसों का धंधा फल-फूल रहा है। गौरीफंटा, तिकुनिया, पलिया, खजुरिया, बसही, चंदनचौकी, नानपारा जैसे क्षेत्रों से प्रतिदिन सैकड़ों बसें चल रही हैं, जिससे रेलवे को रोज करोड़ों रुपये का नुकसान हो रहा है। जनता पूछ रही है कि आखिर रेलवे किसके दबाव में आकर इस क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को लगातार खत्म कर रहा है।
राजनीतिक असर की भी आशंका
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि लखीमपुर खीरी और बहराइच जैसे दो बड़े जिलों में रेलवे सेवा बंद होने से आने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में इसका सीधा असर सत्तारूढ़ दल पर पड़ सकता है। जनता के बढ़ते असंतोष और भरोसे की कमी को लेकर सरकार के लिए यह एक बड़ा चेतावनी संकेत हो सकता है।
जनता की मांग—मैलानी-नानपारा रूट पर भी चले बड़ी रेल लाइन
स्थानीय लोगों की स्पष्ट मांग है कि जिस प्रकार मैलानी से पीलीभीत के बीच बड़ी रेल लाइन चालू हुई, उसी तरह मैलानी से नानपारा तक भी बड़ी रेल लाइन चालू की जाए। जनता जानना चाहती है कि अगर एक ओर रेलवे विकास कर सकता है तो दूसरी ओर यह क्षेत्र क्यों उपेक्षित है? क्या कुछ ताकतवर लोग या डग्गामार बस माफिया इस रूट के विकास में बाधा डाल रहे हैं?
रेलवे अधिकारियों से सीधा सवाल
अब जनता रेलवे अधिकारियों से स्पष्ट जवाब चाहती है—जब मैलानी से पीलीभीत तक बड़ी लाइन बन सकती है, तो मैलानी से नानपारा तक क्यों नहीं

