नई दिल्ली:(इसरान अली)मुकद्दस रमजान का महीना बेशुमार बरकतों वाला है।इस महीने में रोजेदारों पर अल्लाह तआला की रहमतें बरसती हैं। सारे गुनाह माफ हो जाते हैं।इस महीने का तीसरा अशरा 20वें रोजे की मगरिब से शुरू होता है, जो ईद का चांद दिखाई देने तक जारी रहता है।
समाजसेवी ज़ीशान मलिक ने बताया कि जिस व्यक्ति ने दस दिनों का एतकाफ किया,उसने दो हज और दो उमरे के बराबर सवाब हासिल किया। हदीस शरीफ में फ़रमाया गया है।कि जिस बस्ती की मस्जिद में कोई शख्स एतकाफ में बैठकर अल्लाह तआला की इबादत करे तो उस बस्ती के लोगों के गुनाहों को भी माफ कर दिया जाता है।
इस्लाम के मुताबिक, पूरे रमजान को तीन हिस्सों में बांटा गया है। जो पहला, दूसरा और तीसरा अशरा कहलाता है। अशरा अरबी का दस नंबर होता है। इस तरह रमजान के पहले दस दिन पहला अशरा, दूसरे 10 दिन दूसरा अशरा और तीसरे 10 दिन तीसरा अशरा होता है। जिसमें पहला अशरा रहमत का होता है, दूसरा अशरा मगफिरत यानी गुनाहों की माफी का होता है और तीसरा अशरा जहन्नुम की आग से खुद को बचाने का होता है।
इस अशरे में चमत्कारी मगफिरत की रात लैलतुल कद्र भी आती है और कई मुसलमान इस अशरे में एतकाफ (एकांतवास) भी करते हैं। इसलिए मुसलमानों को इस महीने में ज्यादा से ज्यादा इबादत, तिलावत, जिक्र ए खुदा और तौबा, अस्तगफार आदि का विरुद्ध करना चाहिए।

