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रक्षाबंधन: भाई-बहन के अटूट प्रेम और रक्षा के संकल्प का पर्व

दिल्ली:(जीशान मलिक) रक्षाबंधन हिंदू धर्म के प्रमुख त्योहारों में से एक है, जिसे भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और स्नेह का प्रतीक माना जाता है। यह पर्व हर वर्ष श्रावण मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर राखी या रक्षासूत्र बांधती हैं और उनके सुख, समृद्धि एवं लंबी उम्र की कामना करती हैं। वहीं भाई अपनी बहनों की रक्षा करने और हर परिस्थिति में उनका साथ देने का संकल्प लेते हैं।

“क्यों मनाया जाता है रक्षाबंधन”

रक्षाबंधन का मूल भाव रक्षा, प्रेम और पारिवारिक रिश्तों को मजबूत करना है। राखी केवल कलाई पर बांधा जाने वाला धागा नहीं, बल्कि भाई-बहन के बीच विश्वास और जिम्मेदारी का प्रतीक मानी जाती है। इस दिन बहनें भाई के माथे पर तिलक लगाकर आरती करती हैं, मिठाई खिलाती हैं और राखी बांधती हैं। भाई बहन को उपहार देते हैं और उसकी सुरक्षा व सम्मान का संकल्प लेते हैं।

“क्या है रक्षाबंधन का धार्मिक महत्व..

रक्षाबंधन से जुड़ी कई पौराणिक और ऐतिहासिक कथाएं प्रचलित हैं। भगवान श्रीकृष्ण और द्रौपदी की कथा को भी इस पर्व से जोड़ा जाता है। मान्यता है कि भगवान कृष्ण की उंगली में चोट लगने पर द्रौपदी ने अपनी साड़ी का कपड़ा फाड़कर उनकी उंगली पर बांधा था। इसके बाद श्रीकृष्ण ने द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया। इसी भावना को भाई-बहन के पवित्र रिश्ते से जोड़कर देखा जाता है।एक अन्य प्रसिद्ध मान्यता राजा बलि और माता लक्ष्मी से जुड़ी है। इसके अलावा इतिहास में भी रक्षासूत्र को संबंधों और सुरक्षा के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किए जाने के उल्लेख मिलते हैं।

” बदलते दौर में भी कायम है परंपरा!!

आधुनिक समय में रक्षाबंधन मनाने के तौर-तरीकों में बदलाव जरूर आया है, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की भावनात्मक अहमियत आज भी कायम है। दूर रहने वाले भाई-बहनों तक राखियां डाक और ऑनलाइन माध्यमों से पहुंच रही हैं। बाजारों में रंग-बिरंगी, पारंपरिक, बच्चों के लिए आकर्षक और पर्यावरण अनुकूल राखियों की मांग भी बढ़ जाती है।रक्षाबंधन केवल भाई की ओर से बहन की रक्षा का संदेश नहीं देता, बल्कि यह एक-दूसरे के सम्मान, सहयोग, विश्वास और हर सुख-दुख में साथ खड़े रहने का पर्व है। यही वजह है कि समय बदलने के बावजूद इस त्योहार की मिठास और भावनाएं आज भी परिवारों को एक-दूसरे के और करीब लाती हैं।रक्षाबंधन का संदेश केवल पारिवारिक रिश्तों तक सीमित नहीं है। रक्षासूत्र को विश्वास, सद्भाव और सामाजिक जिम्मेदारी के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। कई स्थानों पर लोग पेड़ों, पर्यावरण रक्षकों, सैनिकों और सामाजिक सेवा से जुड़े लोगों को भी रक्षासूत्र बांधकर सम्मान और संरक्षण का संदेश देते हैं।

रक्षाबंधन इसलिए भी खास है क्योंकि यह हमें याद दिलाता है कि रिश्ते केवल खून के संबंधों से नहीं, बल्कि विश्वास, सम्मान और जिम्मेदारी से मजबूत होते हैं। भाई-बहन के इस पवित्र रिश्ते को समर्पित यह पर्व हर परिवार में खुशियां, प्रेम और अपनापन लेकर आता है।

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