
रुड़की:(चीफ एडिटर) भारतीय सेना के कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स की ओर से माउंट त्रिशूल पर्वतारोहण अभियान को शनिवार को रुड़की स्थित बंगाल इंजीनियर ग्रुप एंड सेंटर से औपचारिक रूप से हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। 7,120 मीटर (23,360 फीट) ऊंची माउंट त्रिशूल चोटी पर आरोहण का यह अभियान गढ़वाल हिमालय की चुनौतीपूर्ण चोटियों में से एक पर साहसिक प्रयास है।अभियान के रवाना होने के अवसर पर सेंट्रल कमांड के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता, इंजीनियर-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल विकास रोहेला तथा बंगाल सैपर्स एवं मिलिट्री सर्वे के कर्नल कमांडेंट लेफ्टिनेंट जनरल एसएस दहिया समेत सेना के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। इस दौरान कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स के पर्वतारोहण क्षेत्र में अनुभवी अधिकारियों ने भी अभियान दल से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन किया।
माउंट त्रिशूल की अत्यधिक ऊंचाई, दुर्गम मार्ग और तेजी से बदलता मौसम पर्वतारोहियों के लिए बड़ी चुनौती माने जाते हैं। अभियान के दौरान जवानों की शारीरिक क्षमता, तकनीकी दक्षता, मानसिक दृढ़ता और कठिन परिस्थितियों में टीम के रूप में कार्य करने की क्षमता की परीक्षा होगी।अभियान दल में अनुभवी अधिकारी, जूनियर कमीशंड अधिकारी और अन्य रैंक के जवान शामिल हैं। दल ने अभियान से पहले ऊंचाई वाले वातावरण के अनुकूलन, शारीरिक प्रशिक्षण और पर्वतारोहण की तकनीकों का विशेष अभ्यास किया है। चढ़ाई के दौरान आने वाली तकनीकी एवं रसद संबंधी चुनौतियों से निपटने के लिए भी व्यापक तैयारियां की गई हैं।
समारोह के दौरान अभियान दल के नेता ने विस्तृत प्रस्तुतीकरण के माध्यम से प्रस्तावित मार्ग, चढ़ाई की योजना, सुरक्षा प्रोटोकॉल और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की जानकारी दी। लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने दल की फिटनेस, मानसिक मजबूती और टीम भावना की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह के अभियान सैनिकों में नेतृत्व, अनुशासन, सहनशक्ति, टीमवर्क और परिस्थितियों के अनुरूप जोखिम उठाने की क्षमता को मजबूत करते हैं।समारोह का समापन अभियान दल के नेता को औपचारिक रूप से ‘एक्सपेडिशन फ्लैग’ सौंपे जाने के साथ हुआ। इसके बाद दल को बेस कैंप के लिए रवाना किया गया। यह अभियान कॉर्प्स ऑफ इंजीनियर्स की पर्वतारोहण परंपरा को आगे बढ़ाते हुए भारतीय सेना के साहस, दृढ़ता, अनुशासन और पेशेवर उत्कृष्टता का प्रदर्शन करेगा।

