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माँ कौशल देवी पब्लिक स्कूल में विज्ञान कार्यशाला: छात्रों ने प्रयोगों के जरिए सीखे भौतिकी के जटिल सूत्र

पिरान कलियर:(जीशान मलिक) धनौरी पी.जी. कॉलेज के भौतिकी विभाग तथा इंडियन एसोसिएशन ऑफ फिजिक्स टीचर्स (IAPT) एवं एशियन फिजिक्स ओलंपियाड (APhO) सेल के आउटरीच प्रोग्राम के तहत स्थानीय माँ कौशल देवी पब्लिक स्कूल बेलडा रोड, रहमतपुर, रुड़की) में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।“Experiential Physics Learning Through Innovative Experiments”विषय पर आधारित इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को प्रायोगिक माध्यमों से भौतिकी के सिद्धांतों को समझाना और उनमें वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करना था।

“जीवंत प्रदर्शन से समझाई विज्ञान की बारीकियां…

कार्यशाला में धनौरी पी.जी. कॉलेज के भौतिकी विभाग के विशेषज्ञों ने विभिन्न रोचक प्रयोगों का सजीव प्रदर्शन किया।

डॉ. संदीप कुमार ने फ्लेमिंग के बाएं हाथ के नियम, ओर्स्टेड के प्रयोग और हाइड्रोलिक ब्रेक की कार्यप्रणाली को समझाते हुए विद्युत धारा, चुंबकीय क्षेत्र तथा द्रव दाब से संबंधित सिद्धांतों की व्यावहारिक जानकारी दी।डॉ. वरुण कुमार ने पवन चक्की और विद्युत घंटी के प्रयोगों के माध्यम से पवन ऊर्जा, विद्युत चुंबकत्व और ऊर्जा के व्यावहारिक उपयोगों को बेहद सरल भाषा में स्पष्ट किया। उन्होंने विद्यार्थियों को प्रयोगों का सूक्ष्म अवलोकन करने और अपनी जिज्ञासाएं शांत करने के लिए प्रेरित किया।डॉ. कुमुद चौधरी ने न्यूटन की रंग चक्रिका (Color Disc) और चेन रिएक्शन के प्रयोगों द्वारा रंगों के संयोजन और क्रमिक प्रतिक्रियाओं की प्रक्रिया को रोमांचक तरीके से समझाया।

“विद्यार्थियों में दिखा भारी उत्साह…

कार्यक्रम में कुल 55 छात्र-छात्राओं ने पूरे उत्साह के साथ भाग लिया और वैज्ञानिक उपकरणों की कार्यप्रणाली को नजदीक से समझा। इस अनूठी पहल से बच्चों को किताबों के सैद्धांतिक ज्ञान को वास्तविक प्रयोगों से जोड़ने का बेहतरीन अवसर मिला।

कार्यक्रम के सफल आयोजन पर विद्यालय की प्रधानाचार्या रेनू गोस्वामी और प्रबंधक सीमा गोस्वामी ने विशेष रूप से अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। प्रधानाचार्या रेनू गोस्वामी ने सभी रिसोर्स पर्सन, धनौरी पी.जी. कॉलेज तथा IAPT के एशियन फिजिक्स ओलंपियाड सेल का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे आयोजनों से बच्चों में विज्ञान के प्रति रुचि और गहरी होती है। कार्यक्रम को सफल बनाने में विक्रांत सैनी का भी विशेष सहयोग रहा।

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