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फूलदेई पर्व पर मंत्री की बधाई—लेकिन इस पारंपरिक उत्सव के पीछे छिपी है एक गहरी कहानी!

फूलदेई पर्व पर मंत्री की बधाई—लेकिन इस पारंपरिक उत्सव के पीछे छिपी है एक गहरी कहानी!

ऋषिकेश,मनन ढींगरा

15 मार्च

प्रदेश के क्षेत्रीय विधायक व मंत्री डॉ. प्रेमचंद अग्रवाल ने फूलदेई पर्व के अवसर पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने बच्चों को आशीर्वाद देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की और लोक पर्वों के महत्व पर प्रकाश डाला।

लेकिन इस पर्व की रोशनी के पीछे कहीं छुपा है एक ऐसा रहस्य, जिसे सदियों से पहाड़ों की घाटियों में सहेजा गया है! चैत्र मास की संक्रांति से मनाए जाने वाले इस पर्व में नन्हे मुन्ने बच्चे घर-घर जाकर चौखटों पर फूल डालते हैं। बदले में उन्हें पारंपरिक खील और गुड़ दिया जाता है। लेकिन क्या यह परंपरा केवल उत्सव मनाने की है, या इसके पीछे कुछ और राज़ छिपा है?

कहते हैं, फूलदेई पर्व केवल बच्चों की मासूम खुशी से जुड़ा नहीं, बल्कि यह प्रकृति और समाज के बीच एक गहरा संबंध भी दर्शाता है। वर्षों पहले, इसी पर्व के दौरान एक अनोखी परंपरा शुरू हुई थी, जिसके पीछे छिपे हैं कई अनसुने किस्से! क्या आज भी यह पर्व अपने असली स्वरूप में मनाया जा रहा है, या फिर आधुनिकता ने इसकी आत्मा को बदल दिया है?

इस पर्व की परंपराओं को निभाते हुए लोग अपनी जड़ों से जुड़े रहते हैं, लेकिन क्या समय के साथ इसमें कोई बदलाव आ रहा है? मंत्री  ने प्रदेशवासियों को इस पर्व की बधाई तो दी|

 

 

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