ऋषिकेश:(मनन ढींगरा)परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश में आज उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती के बीच एक आत्मीय और प्रेरणादायक भेंटवार्ता सम्पन्न हुई। इस अवसर पर दोनों महान विभूतियों ने चार धाम यात्रा की महत्ता, भारतीय संस्कृति के संरक्षण और आध्यात्मिक जागृति जैसे विषयों पर गहन चर्चा की।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा कि भारत के चार धाम न केवल तीर्थस्थल हैं, बल्कि आत्मिक शुद्धि और जागरण के केंद्र हैं। उन्होंने कहा, “चार धाम यात्रा केवल बाह्य यात्रा नहीं, यह एक भीतरी परिवर्तन और आत्मिक उन्नयन की प्रक्रिया है।” उन्होंने यह भी जोड़ा कि आज की भौतिकता से भरी दुनिया में चार धाम यात्रा एक शांति, करुणा और सेवा का संदेश लेकर आती है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि चार धाम यात्रा भारतीय संस्कृति, आस्था और संस्कारों का जीवन्त स्वरूप है। उन्होंने बताया कि उत्तराखंड सरकार इस वर्ष की यात्रा के लिए विशेष तैयारियों में जुटी है। स्वास्थ्य सुविधाओं, यातायात प्रबंधन, स्वच्छता और सुरक्षा के क्षेत्र में व्यापक प्रबंध किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से अपील की कि वे पर्यावरण का सम्मान करें, सिंगल यूज प्लास्टिक से बचें और स्वच्छ भारत अभियान में योगदान दें।
भेंटवार्ता के दौरान दोनों नेताओं ने देशवासियों को चार धाम यात्रा में सहभागी बनने का आह्वान किया और इसे आत्मिक उत्थान तथा राष्ट्र के सांस्कृतिक पुनर्जागरण का माध्यम बताया।
“आइए, चार धामों की दिव्यता को आत्मसात करें और अपने जीवन में प्रेम, करुणा, सेवा और संस्कारों को स्थापित करें,”—यही संदेश रहा इस प्रेरणादायक मुलाकात का सार।

