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उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के जीवन पर आधारित पुस्तक ‘चुनौतियाँ मुझे पसंद हैं’ का लखनऊ में भव्य विमोचन

उत्तरप्रदेश:(मनन ढींगरा)उत्तरप्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के प्रेरणास्पद जीवन पर आधारित पुस्तक ‘चुनौतियाँ मुझे पसंद हैं’ का लोकार्पण आज लखनऊ स्थित पं. अटल बिहारी वाजपेयी बहुउद्देशीय सभागार में बड़े ही गरिमामयी वातावरण में संपन्न हुआ। इस अवसर पर भारत के उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनखड़, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे।

इस भव्य कार्यक्रम में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के जीवन पर आधारित एक मार्मिक डॉक्यूमेंट्री का प्रदर्शन भी किया गया, जिसमें उनके जीवन संघर्ष, सेवा भावना, महिला सशक्तिकरण के प्रति समर्पण और गुजरात की मुख्यमंत्री से लेकर उत्तरप्रदेश की राज्यपाल तक की राजनीतिक यात्रा को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया। डॉक्यूमेंट्री ने यह संदेश भी दिया कि आनंदीबेन ने जीवन की कठिन चुनौतियों को अपनी शक्ति बनाया।

कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल कलराज मिश्र, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक, विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना, प्रमुख सचिव मनोज कुमार सिंह, राज्यपाल की पुत्री अनार पटेल एवं पुत्र संजय भाई समेत समाज के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े विशिष्टजन भी मौजूद रहे।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने संबोधन में कहा, “आनंदीबेन पटेल का जीवन साहस, संवेदना और सेवा का प्रतीक है। यह पुस्तक युवाओं को यह सिखाएगी कि कठिनाइयों को पराजय नहीं, आत्मबल का अवसर बनाएं।”

स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने कहा, “यह पुस्तक केवल एक जीवनी नहीं, बल्कि एक जीवन-दर्शन है। आनंदीबेन जी का जीवन ‘सेवा परमो धर्मः’ का सजीव उदाहरण है।”

भावविभोर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने कहा, “यह पुस्तक मेरा नहीं, हर उस नारी का प्रतिबिंब है जो समाज और राष्ट्र के लिए चुनौतियों को स्वीकार कर आगे बढ़ती है। मेरी सबसे बड़ी प्रेरणा सदैव समाज की सेवा रही है।”

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा, “आनंदीबेन पटेल का जीवन राष्ट्रसेवा और मातृशक्ति के उत्कर्ष का अनुपम उदाहरण है। उत्तरप्रदेश को गर्व है कि उन्हें ऐसा नेतृत्व प्राप्त है।”

राज्यपाल की पुत्री अनार पटेल ने भावुक शब्दों में कहा, “माँ का जीवन हमारे लिए एक जीवंत पाठशाला है। उन्होंने सिखाया कि अनुभव ही सबसे बड़ा गुरु और सेवा सबसे बड़ी पूंजी है।”

कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। इस अवसर पर स्वामी चिदानन्द सरस्वती ने सभी विशिष्ट अतिथियों को रुद्राक्ष का पौधा भेंट कर परमार्थ निकेतन की दिव्य गंगा आरती में आमंत्रित किया।

यह समारोह नारी शक्ति, सेवा और नेतृत्व के नए प्रतिमान प्रस्तुत करता है, और ‘चुनौतियाँ मुझे पसंद हैं’ पुस्तक न केवल एक प्रेरक जीवनगाथा है, बल्कि प्रत्येक संघर्षशील महिला और युवा के लिए संकल्प और सेवा से सफलता प्राप्त करने की प्रेरणा है।

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